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पाकिस्तान में हाहाकार: गरीबी की गर्त में डूबता पड़ोसी देश, 7 करोड़ के पास बुनियादी सुविधाओं का अभाव

21-02-2026

पाकिस्तान में हाहाकार: गरीबी की गर्त में डूबता पड़ोसी देश, 7 करोड़ के पास बुनियादी सुविधाओं का अभाव

पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। योजना आयोग (Planning Commission) और पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (PBS) द्वारा हाल ही में (फरवरी 2026) जारी किए गए 'हाउसहोल्ड इंटीग्रेटेड इकोनॉमिक सर्वे (HIES) 2024-25' के आंकड़ों ने देश की बदहाली की एक भयावह तस्वीर पेश की है। पिछले 6 सालों में गरीबी का स्तर न केवल बढ़ा है, बल्कि इसने पिछले दो दशकों की प्रगति को भी शून्य कर दिया है।

आंकड़ों की जुबानी: बढ़ती गरीबी का ग्राफ

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में गरीबी की दर में जबरदस्त उछाल आया है। 2018-19 के बाद से गरीबी कम होने के बजाय तेजी से बढ़ी है:

| क्षेत्र | गरीबी दर (2018-19) | गरीबी दर (2024-25) | वृद्धि |

|---|---|---|---|

| राष्ट्रीय औसत | 21.9% | 28.9% | +7% |

| शहरी क्षेत्र | 11.0% | 17.4% | +6.4% |

| ग्रामीण क्षेत्र | 28.2% | 36.2% | +8% |

> हैरान करने वाला तथ्य: पाकिस्तान की लगभग 24 करोड़ की आबादी में से अब 6.94 करोड़ लोग आधिकारिक गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। यानी देश का हर चौथा व्यक्ति अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने में असमर्थ है।

बदहाली के 4 मुख्य विलेन: क्यों हुआ ऐसा हाल?

योजना आयोग के मंत्री अहसान इकबाल और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने इस संकट के लिए चार प्रमुख कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:

 * महंगाई का तांडव (Hyper-inflation): पाकिस्तान में महंगाई की दर पिछले कुछ वर्षों में रिकॉर्ड स्तर पर रही है। आटा, दाल और बिजली की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि ने मध्यम वर्ग को भी गरीबी रेखा के नीचे धकेल दिया है।

 * प्राकृतिक आपदाएं (Floods): 2022 और फिर 2025 में आई विनाशकारी बाढ़ ने देश के कृषि ढांचे को तहस-नहस कर दिया। गांवों में गरीबी दर का 36.2% तक पहुंचना इसी का परिणाम है, क्योंकि वहां लाखों लोगों की फसलें और मवेशी बाढ़ की भेंट चढ़ गए।

 * रोजगार का संकट: आर्थिक सुस्ती और उद्योगों के बंद होने के कारण नए रोजगार पैदा नहीं हो रहे हैं। शिक्षित युवा या तो देश छोड़ रहे हैं या कम वेतन वाली नौकरियों में संघर्ष कर रहे हैं।

 * कठिन सुधार और IMF की शर्तें: पाकिस्तान को दिवालिया होने से बचाने के लिए IMF से लिए गए बेलआउट पैकेज और उनकी सख्त शर्तों (जैसे सब्सिडी खत्म करना और टैक्स बढ़ाना) ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है।

अमीर-गरीब के बीच बढ़ती खाई

सर्वे यह भी बताता है कि पाकिस्तान में न केवल गरीबी बढ़ी है, बल्कि असमानता (Inequality) भी चरम पर है। देश में अमीर और अमीर होते जा रहे हैं, जबकि सबसे गरीब तबके की 'वास्तविक आय' (Real Income) में लगभग 45% की गिरावट दर्ज की गई है।

प्रांतीय स्तर पर स्थिति और भी गंभीर है:

 * सिंध: यहां गरीबी दर बढ़कर 35.9% हो गई है।

 * पंजाब: 28.4% से बढ़कर 32% हुई।

 * बलूचिस्तान: यहां भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

निष्कर्ष: क्या कोई उम्मीद बाकी है?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को 'उपभोग-आधारित' (Consumption-based) से हटाकर 'निर्यात-उन्मुख' (Export-led) नहीं बनाता, तब तक गरीबी का यह दुष्चक्र नहीं टूटेगा। फिलहाल, आम पाकिस्तानी नागरिक के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।


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