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संकट के आसमान में भारतीय पंख: पश्चिम एशिया के लिए 62 उड़ानों का 'मिशन एयरलिफ्ट'
संकट के आसमान में भारतीय पंख: पश्चिम एशिया के लिए 62 उड़ानों का 'मिशन एयरलिफ्ट'
भूमिका: अनिश्चितता के बीच उड़ानों का साहस
जब खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया के आसमान में युद्ध के बादल मंडरा रहे हों, तब भारत की प्रमुख एयरलाइंस का एक ही दिन में 62 उड़ानों का संचालन करना किसी बड़े रणनीतिक ऑपरेशन से कम नहीं है। एयर इंडिया समूह (20 नियमित और 12 विशेष उड़ानें) और इंडिगो (30 उड़ानें) ने मिलकर आज यह सुनिश्चित किया है कि खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए घर वापसी या आवश्यक यात्रा के रास्ते बंद न हों। यह 'मिशन' तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई अन्य एयरलाइंस ने इस क्षेत्र के लिए अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी हैं।
विशेष उड़ानों का महत्व: '12 स्पेशल फ्लाइट्स' की कहानी
आज के शेड्यूल में सबसे खास बात एयर इंडिया की 12 विशेष उड़ानें हैं। नियमित उड़ानों के अलावा विशेष विमान भेजना इस बात का संकेत है कि:
* बढ़ती मांग: खाड़ी देशों में फंसे हुए या घर लौटने के इच्छुक भारतीयों की संख्या अचानक बढ़ी है।
* आपातकालीन निकासी की तैयारी: यह उड़ानें एक तरह का 'ड्राय रन' या पूर्व-अभ्यास भी हो सकती हैं, ताकि ज़रूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा सके।
* राहत और रसद: इन उड़ानों का उपयोग केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि आवश्यक सामग्री और चिकित्सा आपूर्ति के लिए भी किया जा सकता है।
पश्चिम एशिया का 'अग्निपथ': उड़ान मार्ग की चुनौतियां
इन 62 उड़ानों का संचालन करना कोई आसान काम नहीं है। वर्तमान में पश्चिम एशिया के हवाई क्षेत्र (Airspace) में कई जोखिम हैं:
* होर्मुज और खर्ग द्वीप का तनाव: जैसा कि हालिया रिपोर्टों में बताया गया है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को मित्र देशों के जहाजों के लिए खोल दिया है और खर्ग द्वीप पर सुरक्षा बढ़ाई है, ठीक वैसा ही तनाव आसमान में भी है। उड़ानों को सुरक्षित 'एयर कॉरिडोर' से ले जाना पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के लिए बड़ी चुनौती है।
* रूट डायवर्जन: युद्ध जैसी स्थिति के कारण कई उड़ानों को लंबे रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और परिचालन लागत बढ़ रही है। लेकिन इंडिगो और एयर इंडिया जैसी कंपनियों ने लागत से ऊपर 'सेवा' को रखा है।
संजय राउत के 'वैश्विक संकट' और 'प्रधानमंत्री की भूमिका' पर प्रभाव
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने हाल ही में सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति और "विश्व में चल रहे बड़े संकट" पर जो सवाल उठाए थे, उसका एक सीधा सिरा इन उड़ानों से जुड़ता है।
विपक्ष का तर्क है कि जब हमारे 60 से अधिक विमान एक युद्ध-संभावित क्षेत्र में उड़ान भर रहे हों, तो देश के शीर्ष नेतृत्व को सीधे तौर पर इस पर निगरानी रखनी चाहिए। 62 फ्लाइट्स में सवार हजारों भारतीयों की सुरक्षा एक 'राष्ट्रीय मुद्दा' है। क्या सरकार ने इन उड़ानों के लिए सुरक्षा गारंटी ली है? क्या वायुसेना को 'स्टैंडबाय' मोड पर रखा गया है? ये ऐसे प्रश्न हैं जो संसदीय जवाबदेही के दायरे में आते हैं।
आर्थिक और मानवीय पहलू: प्रवासियों की लाइफलाइन
पश्चिम एशिया भारत के लिए 'प्रेषण' (Remittance) का सबसे बड़ा स्रोत है। केरल, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के लाखों परिवार इन उड़ानों पर निर्भर हैं।
* रोजगार की सुरक्षा: उड़ानें जारी रहने से वहां काम कर रहे भारतीयों में सुरक्षा का भाव बना रहता है। उन्हें लगता है कि यदि स्थिति बिगड़ी, तो उनकी सरकार और एयरलाइंस उन्हें अकेला नहीं छोड़ेंगी।
* पेट्रोल-डीजल और ऊर्जा कनेक्शन: जैसा कि हमने देखा कि होर्मुज के रास्ते तेल और LPG की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, ये उड़ानें उसी 'सप्लाई चेन' का मानवीय हिस्सा हैं। जहाँ जहाज तेल ला रहे हैं, वहीं ये विमान हमारे 'मानव संसाधन' को सुरक्षित रख रहे हैं।
सड़क हादसों और आपदाओं के बीच विमानन सुरक्षा
अभी कल ही आंध्र प्रदेश के मरकापुरम में हुई बस दुर्घटना और पाकिस्तान में आए भूकंप ने हमें सुरक्षा के प्रति सचेत किया है। सड़क और रेल की तुलना में विमानन क्षेत्र (Aviation) में सुरक्षा के मानक कहीं अधिक कड़े होते हैं। आज की इन 62 उड़ानों के लिए 'वेदर ऑडिट' और 'सीस्मिक एक्टिविटी' की भी जांच की गई होगी, ताकि भूकंप के बाद के झटकों (Aftershocks) से उड़ानों के लैंडिंग सिस्टम पर कोई असर न पड़े।
निष्कर्ष: 13 अप्रैल (खरमास) और नई उम्मीदें
13 अप्रैल को खरमास समाप्त होने के बाद जब भारत में कई नए शुभ कार्यों की शुरुआत होगी (जैसे बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव), तब तक यह उम्मीद की जानी चाहिए कि पश्चिम एशिया का यह संकट भी शांत हो जाए।
आज की 62 उड़ानें केवल विमानों का परिचालन नहीं हैं, बल्कि ये भारत की 'सॉफ्ट पावर' का प्रदर्शन हैं। यह दिखाती हैं कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी सीमा या आसमान को पार करने की हिम्मत रखता है।
चाहे वह इंडिगो का किफायती मॉडल हो या एयर इंडिया का विशाल अनुभव, आज का यह संयुक्त प्रयास भारत की 'विमानन शक्ति' को विश्व पटल पर गौरवान्वित करता है। अब सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि वे मिलकर इन प्रवासियों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा जरूरतों पर एक स्वर में बात करें।
