Near Janipur Thana, Phulwari Sharif, Patna
पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की अंधाधुंध फायरिंग में 55 प्रदर्शनकारियों की मौत, स्थिति अत्यंत तनाव
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK - पोंछ-रावलकोट क्षेत्र) से एक बेहद विचलित करने वाली और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आ रही है। रावलकोट में पिछले कई दिनों से चल रहा जन-आंदोलन अब पूरी तरह से खूनी संघर्ष में तब्दील हो चुका है। स्थानीय नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों (सेना और अर्धसैनिक बल 'पाकिस्तानी रेंजर्स') ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं।
रावलकोट में स्थिति इस समय अत्यंत गंभीर और नियंत्रण से बाहर बताई जा रही है। प्राप्त रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तानी रेंजर्स और सेना के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के नाम पर उन पर सीधे और अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। करीब 20-20 मिनट के दो अलग-अलग राउंड में सुरक्षा बलों ने न केवल रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया, बल्कि निहत्थे नागरिकों पर प्रतिबंधित सैन्य हथियारों जैसे AK-47 राइफलों से सीधी फायरिंग की। इस अमानवीय और बर्बर कार्रवाई में अब तक कम से कम 55 स्थानीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। रावलकोट और उसके आसपास के इलाकों में सेना की इस कार्रवाई के बाद से भारी आक्रोश और तनाव व्याप्त है।
9 जून से सुलग रहा है PoK: विरोध प्रदर्शन की वजह क्या है?
रावलकोट में यह हिंसक मोड़ अचानक नहीं आया है। स्थानीय जनता का यह व्यापक विरोध प्रदर्शन बीते 9 जून से लगातार जारी है। PoK की जनता पिछले लंबे समय से पाकिस्तानी हुकूमत के सौतेले व्यवहार, आर्थिक शोषण और मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ सड़कों पर है। इस ताजा आंदोलन के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण बताए जा रहे हैं:
1. असहनीय महंगाई और बुनियादी सुविधाओं का अभाव: PoK में आटे, दाल, चीनी जैसी खाद्य सामग्रियों की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके अलावा, क्षेत्र में भारी बिजली कटौती (लोड शेडिंग) हो रही है, जबकि इसी क्षेत्र के पानी से पाकिस्तान के अन्य प्रांतों के लिए बिजली बनाई जाती है।
2. भारी टैक्स और सब्सिडी का खत्म होना: पाकिस्तानी सरकार ने PoK के नागरिकों पर भारी टैक्स लगा दिए हैं और उन्हें मिलने वाली सब्सिडी को खत्म कर दिया है, जिससे आम जनता का जीना दूभर हो गया है।
3. पाकिस्तानी सेना का अत्याचार: स्थानीय युवाओं को जबरन उठाना, असहमति की आवाजों को दबाना और अभिव्यक्ति की आजादी पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के कारण जनता का गुस्सा फूट पड़ा है।
9 जून को शुरू हुआ यह प्रदर्शन देखते ही देखते एक जन-आंदोलन में बदल गया, जिसमें महिलाएं, बुजुर्ग, छात्र और स्थानीय व्यापारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने रावलकोट की सड़कों को जाम कर दिया और पाकिस्तान सरकार व सेना के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
20-20 मिनट का मौत का तांडव: AK-47 से अंधाधुंध फायरिंग
जब स्थानीय प्रशासन और पुलिस प्रदर्शनकारियों को रोकने में पूरी तरह विफल रहे, तो इस्लामाबाद के हुक्मरानों ने इस आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी रेंजर्स और सेना की टुकड़ियों को रावलकोट में तैनात कर दिया।
चश्मदीदों और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों ने बिना किसी पूर्व चेतावनी या बातचीत की कोशिश के, प्रदर्शनकारियों के हुजूम पर हमला बोल दिया। सेना और रेंजर्स ने दो चरणों में मौत का तांडव रचा:
• पहला राउंड (20 मिनट): सुरक्षा बलों ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े और फिर रबर की गोलियों से अंधाधुंध फायरिंग की। जब प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे, तो सैनिकों ने उनके ऊपर सीधे वार करना शुरू कर दिया।
• दूसरा राउंड (20 मिनट): यह राउंड सबसे घातक साबित हुआ। प्रदर्शनकारियों के संकल्प को तोड़ने के लिए पाकिस्तानी रेंजर्स ने अपनी AK-47 राइफलें खोल दीं। लगभग 20 मिनट तक रावलकोट की सड़कें गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंजती रहीं। सेना ने भागते हुए लोगों, निहत्थे युवाओं और यहां तक कि घायलों को बचा रहे लोगों पर भी सीधे गोलियां चलाईं।
इस अंधाधुंध गोलीबारी का नतीजा यह हुआ कि देखते ही देखते रावलकोट की सड़कें खून से लाल हो गईं। अस्पताल लाते-लाते और मौके पर ही कुल 55 लोगों ने दम तोड़ दिया। मृतकों का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है क्योंकि कई घायलों की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।
अस्पतालों में आपातकाल, इंटरनेट और संचार सेवाएं पूरी तरह ठप
इस भीषण रक्तपात के बाद रावलकोट के स्थानीय अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है। अस्पतालों में बेड कम पड़ गए हैं और घायलों के इलाज के लिए दवाइयों तथा खून की भारी किल्लत देखी जा रही है। स्थानीय डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ ने आम जनता से आपातकालीन रक्तदान की अपील की है।
वहीं दूसरी ओर, अपनी इस बर्बरता को दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए पाकिस्तानी प्रशासन ने पूरे रावलकोट और आसपास के जिलों में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया है। मोबाइल नेटवर्क ठप हैं, और स्थानीय मीडिया पर इस खबर को दिखाने पर पूरी तरह से सेंसरशिप लागू कर दी गई है। सोशल मीडिया पर जो कुछ वीडियो और तस्वीरें लीक होकर बाहर आ पा रही हैं, वे वहां के खौफनाक मंजर को बयां करने के लिए काफी हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ रही हैं मांगें और भारत का रुख
PoK (रावलकोट) में मानवाधिकारों के इस खुले और क्रूर उल्लंघन ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान इस विवादित क्षेत्र की ओर खींचा है। दुनिया भर में रह रहे कश्मीरी प्रवासियों और मानवाधिकार संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) से इस नरसंहार का संज्ञान लेने और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
भारत हमेशा से यह रुख अपनाता रहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख (जिसमें PoK और अक्साई चिन शामिल हैं) भारत का अभिन्न हिस्सा है। PoK में रह रहे लोग दशकों से पाकिस्तानी सेना के दमन को झेल रहे हैं। रावलकोट की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पाकिस्तान सरकार PoK के नागरिकों को अपने देश का हिस्सा नहीं, बल्कि केवल एक उपनिवेश मानती है, जिसका इस्तेमाल वह अपने संसाधनों के लिए करती है।
निष्कर्ष: आगे क्या?
55 लोगों की शहादत के बाद रावलकोट और पूरे PoK में गुस्सा और बारूद जैसी स्थिति बन गई है। पाकिस्तानी सेना ने भले ही गोलियों के दम पर प्रदर्शनकारियों को सड़कों से हटाने की कोशिश की हो, लेकिन इस दमन चक्र ने जनता के भीतर आजादी और हक की लड़ाई की आग को और भड़का दिया है। रावलकोट में लगाया गया कर्फ्यू और सेना की भारी तैनाती भी स्थानीय लोगों के आक्रोश को दबाने में नाकाम साबित हो रही है। आने वाले दिन इस क्षेत्र के लिए बेहद संवेदनशील होने वाले हैं, और यह आंदोलन पाकिस्तान के लिए एक बड़ा आंतरिक सुरक्षा संकट बन सकता है।
