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मिडिल ईस्ट तनाव की आड़ में डिजिटल ठगी: गैस संकट का डर और ₹2.7 करोड़ का घोटाला

28-04-2026

आज के दौर में साइबर अपराधी समाज में व्याप्त डर, अनिश्चितता और लोगों की जरूरतों को अपने फायदे का हथियार बना रहे हैं। हाल ही में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर गैस आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे आम जनता में भविष्य में गैस संकट की आशंका पैदा हो गई है। इसी डर का लाभ उठाते हुए साइबर ठगों ने एक नया और खतरनाक जाल बुना है। मुंबई पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने अब तक 100 से ज्यादा लोगों को अपना निशाना बनाया है और उनसे कुल 2.7 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि ठग ली है।

ठगी का नया ‘मॉडल’: गैस कनेक्शन के नाम पर लूट

साइबर अपराधियों की यह कार्यप्रणाली अत्यंत सोची-समझी है। वे किसी कंपनी के ग्राहक बनकर नहीं, बल्कि स्वयं गैस कंपनी के 'अधिकारी' बनकर लोगों को कॉल करते हैं। ठगों का मुख्य फोकस उन लोगों पर होता है जो पीएनजी (PNG) या एलपीजी (LPG) सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं।

1. डर का माहौल बनाना: ठग फोन पर लोगों को डराते हैं कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण उनके क्षेत्र में गैस की सप्लाई प्रभावित होने वाली है। वे दावा करते हैं कि कंपनी को अपने ग्राहकों के कनेक्शन को 'अपडेट' या 'री-वेरिफाई' करने की आवश्यकता है, अन्यथा उनका कनेक्शन काट दिया जाएगा।

2. ऐप इंस्टॉल करने का झांसा: विश्वास जीतने के लिए वे पीड़ित को एक लिंक भेजते हैं और एक विशेष 'गैस सर्विस ऐप' या 'रिमोट एक्सेस ऐप' इंस्टॉल करने के लिए कहते हैं। वे इसे अनिवार्य और आधिकारिक प्रक्रिया बताते हैं।

3. डिजिटल कंट्रोल: जैसे ही पीड़ित उस लिंक पर क्लिक करके ऐप इंस्टॉल करता है, उसके फोन का पूरा रिमोट एक्सेस उन अपराधियों के पास चला जाता है। इसके बाद, अपराधी पीड़ित के बैंक ऐप्स, ओटीपी (OTP) और व्यक्तिगत डेटा तक आसानी से पहुंच जाते हैं।

4. पैसे की निकासी: एक बार फोन का नियंत्रण मिलने के बाद, वे चुटकियों में पीड़ित के बैंक खातों से सारी जमा-पूंजी ट्रांसफर कर लेते हैं। कई मामलों में पीड़ित को पता भी नहीं चलता कि उसके फोन के माध्यम से उसका बैंक खाता खाली हो चुका है।

क्यों हो रहे हैं लोग शिकार?

इस ठगी के पीछे सबसे बड़ा कारण ‘भय’ है। जब किसी व्यक्ति को लगता है कि उसकी बुनियादी जरूरत—जैसे कि रसोई की गैस—बंद हो जाएगी, तो वह तर्कसंगत सोचने की क्षमता खो देता है। अपराधियों ने मनोवैज्ञानिक रूप से इस बात का लाभ उठाया है। इसके अतिरिक्त, तकनीकी जागरूकता की कमी भी लोगों को इस जाल में फंसा रही है।

मुंबई पुलिस की चेतावनी और सावधानी के उपाय

मुंबई पुलिस ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए लोगों को आगाह किया है कि वे ऐसे कॉल के प्रति अत्यधिक सतर्क रहें। साइबर अपराध से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम निम्नलिखित हैं:

• अज्ञात लिंक से बचें: कभी भी किसी अनजान नंबर से आए लिंक पर क्लिक न करें। आधिकारिक ऐप केवल गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें।

• रिमोट एक्सेस ऐप्स से दूरी: ‘AnyDesk’, ‘TeamViewer’ या ‘Screen Share’ जैसे ऐप्स किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर कभी इंस्टॉल न करें। ये ऐप्स आपके फोन का पूरा कंट्रोल दूसरे के हाथों में दे देते हैं।

• सत्यापन करें: यदि आपको गैस कंपनी की ओर से कोई कॉल आता है, तो घबराएं नहीं। फोन काट दें और खुद अपने नजदीकी गैस वितरण कार्यालय जाकर जानकारी प्राप्त करें।

• गोपनीयता रखें: अपना ओटीपी (OTP), पासवर्ड या बैंक विवरण किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। सरकारी या अधिकृत गैस कंपनियां कभी भी आपसे फोन पर रिमोट ऐप इंस्टॉल करने के लिए नहीं कहती हैं।

डिजिटल युग में सतर्कता ही सुरक्षा है

2.7 करोड़ रुपये की यह ठगी केवल पैसों का नुकसान नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है कि अपराधी किसी भी स्थिति को अपने फायदे में बदल सकते हैं। मिडिल ईस्ट का तनाव हो या कोई अन्य वैश्विक घटना, ठगों का उद्देश्य हमेशा एक ही होता है—लोगों की घबराहट का फायदा उठाना।

यदि आप या आपका कोई परिचित इस प्रकार की किसी कॉल का शिकार हुआ है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर '1930' पर कॉल करें और www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराई जाएगी, आपके पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

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