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इंडिगो को चौथी तिमाही में ₹2,536 करोड़ का घाटा
भारत की सबसे बड़ी बजट एयरलाइन इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। 29 मई 2026 को जारी किए गए इन नतीजों ने बाजार और निवेशकों को चौंका दिया है। कंपनी को इस तिमाही में भारी घाटे का सामना करना पड़ा है, जिसने पिछले साल के मुनाफे को पूरी तरह से धो दिया है।
चौथी तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, इंडिगो को ₹2,536.9 करोड़ का कॉन्सोलिडेटेड नेट लॉस (शुद्ध घाटा) हुआ है। यह स्थिति पिछले साल की समान तिमाही से बिल्कुल उलट है, जब कंपनी ने ₹3,067.5 करोड़ का शानदार शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था। मुनाफे से सीधे इतने बड़े घाटे में जाने (PAT में करीब 182% की गिरावट) ने विमानन क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों को उजागर कर दिया है।
राजस्व में मामूली बढ़त, लेकिन परिचालन घाटा भारी
दिलचस्प बात यह है कि घाटे के बावजूद कंपनी के राजस्व में गिरावट नहीं आई है, जिससे साफ होता है कि समस्या टिकटों की बिक्री में नहीं, बल्कि बढ़ते खर्चों और बाहरी कारकों में थी।
• ऑपरेशन्स से राजस्व: चौथी तिमाही में ऑपरेशन्स से मिलने वाला राजस्व मामूली रूप से 1.3% बढ़कर ₹22,438.4 करोड़ रहा, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹22,151.9 करोड़ था।
• कुल आय: कंपनी की कुल आय 3.17% की बढ़ोतरी के साथ ₹23,830.7 करोड़ दर्ज की गई।
• यात्री संख्या और क्षमता: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के संघर्ष और अन्य व्यवधानों के बावजूद इंडिगो की क्षमता में 3.4% की वृद्धि हुई, हालांकि कुल यात्रियों की संख्या 1.1% घटकर 31.6 मिलियन रह गई।
इंडिगो की उड़ान को रोकने वाले 3 मुख्य कारण
मैनेजमेंट और वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, इंडिगो के मुनाफे को घाटे में बदलने के पीछे तीन सबसे बड़े और महत्वपूर्ण कारण रहे हैं:
1. घरेलू क्षमता पर पाबंदियां और परिचालन व्यवधान
विमानन क्षेत्र पिछले कुछ महीनों से गंभीर परिचालन व्यवधानों से गुजर रहा है। दिसंबर 2025 में नए 'फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस' नियमों को लागू करने में आई दिक्कतों और गंभीर पायलट शॉर्टेज के कारण इंडिगो को 5,000 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं। इन व्यवधानों और लेबर कोड से जुड़े बदलावों के चलते कंपनी पर ₹1,717 करोड़ का एक्सेप्शनल कॉस्ट (असाधारण खर्च) आया, जिसने वित्तीय सेहत को भारी नुकसान पहुंचाया।
2. रुपए की रिकॉर्ड कमजोरी
भारतीय विमानन कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव बेहद संवेदनशील होता है। इंडिगो के कई बड़े खर्च, जैसे कि विमानों का लीज रेंट, विदेशी रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की खरीद डॉलर में होती है। इस तिमाही के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में आई भारी गिरावट के कारण कंपनी को भारी 'फॉरेक्स लॉस' (विदेशी मुद्रा विनिमय घाटा) झेलना पड़ा।
मैनेजमेंट का बयान: "अगर हम विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव और वन-टाइम एक्सेप्शनल खर्चों के प्रभाव को हटा दें, तो इंडिगो ने वास्तव में ₹1,920.6 करोड़ का परिचालन लाभ कमाया होता।"
3. एविएशन फ्यूल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव
एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ (ATF) किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग 40% हिस्सा होता है। मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और ईंधन की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहीं। इसके अलावा, उड़ानों के रूट में हुए बदलाव के कारण विमानों को लंबा सफर तय करना पड़ा, जिससे ईंधन की खपत और एयरलाइन के गैर-ईंधन खर्चों में 7.3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
मैनेजमेंट की टिप्पणी और आगे की रणनीति
नतीजों पर बात करते हुए इंटरग्लोब एविएशन के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया ने कहा:
"वित्त वर्ष 2026 बेहद चुनौतीपूर्ण परिचालन माहौल से भरा रहा, जिसने हमारी लाभप्रदता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, हमारे बिजनेस का मूल प्रदर्शन लचीला बना हुआ है। हमारी बैलेंस शीट अभी भी मजबूत है और हमारे पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध है।"
रणनीतिक कदम: भविष्य के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए, कंपनी के बोर्ड ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के माध्यम से विमान, इंजन और कलपुर्जे खरीदने के लिए 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक के फाइनेंस लीज दायित्वों के आंशिक प्री-पेमेंट (समय से पहले भुगतान) को मंजूरी दी है। इससे कंपनी को आने वाले समय में लीज रेंट के रूप में होने वाले खर्चों को बचाने में मदद मिलेगी।
शेयर बाजार पर असर
इन कमजोर नतीजों की आशंका के चलते नतीजों की घोषणा वाले दिन (29 मई 2026) को बाजार बंद होने से पहले इंडिगो के शेयरों पर भारी दबाव देखा गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर इंटरग्लोब एविएशन का शेयर 3.27% गिरकर ₹4,418.40 पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ, साल 2026 में अब तक इंडिगो का स्टॉक करीब 14% तक टूट चुका है।
निष्कर्ष
इंडिगो के चौथी तिमाही के नतीजे बताते हैं कि एविएशन सेक्टर में मांग मजबूत होने के बावजूद बाहरी चुनौतियां जैसे—कमजोर रुपया, ईंधन की महंगाई और नीतियां कितनी बड़ी रुकावट बन सकती हैं। देश की 63% से अधिक घरेलू बाजार हिस्सेदारी रखने वाली इंडिगो के लिए यह घाटा एक बड़ा वेक-अप कॉल है। अब कंपनी का पूरा ध्यान राहुल भाटिया के नेतृत्व में परिचालन खर्चों को नियंत्रित करने, पायलटों की कमी को दूर करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए सुरक्षित रूट्स का विस्तार करने पर केंद्रित रहेगा।
