Near Janipur Thana, Phulwari Sharif, Patna
जीडीपी ग्रोथ अनुमान में 0.3% की कटौती, महंगाई दर बढ़कर 5.1% होने का अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने के एलान के बाद, अब केंद्रीय बैंक ने देश की आर्थिक सेहत से जुड़े दो सबसे महत्वपूर्ण आंकड़े जारी कर दिए हैं। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए देश की विकास दर और महंगाई दर के नए अनुमान पेश किए हैं।
आरबीआई की यह नई रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए थोड़ी चिंताजनक और चौंकाने वाली है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, देश की विकास दर में गिरावट आने की आशंका है, जबकि आम जनता की जेब पर असर डालने वाली महंगाई दर में भारी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है।
आइए विस्तार से समझते हैं कि आरबीआई के इन नए अनुमानों के पीछे क्या कारण हैं और इनका देश की अर्थव्यवस्था व आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा।
1. जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान: 6.9% से घटकर 6.6% हुआ
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए देश की आर्थिक विकास दर के अनुमान में बड़ी कटौती की है। केंद्रीय बैंक ने पिछली तिमाही के मुकाबले जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को 0.3% घटा दिया है।
• पिछला अनुमान: 6.9%
• नया अनुमान: 6.6%
विकास दर में गिरावट के मुख्य कारण:
1. वैश्विक मंदी और भू-राजनीतिक तनाव: दुनिया के कई बड़े देशों में आर्थिक सुस्ती का माहौल है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत के एक्सपोर्ट (निर्यात) पर बुरा असर पड़ रहा है।
2. घरेलू खपत में सुस्ती: ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में कुछ खास सेक्टर्स में मांग उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी है। ब्याज दरों के लंबे समय से ऊंचे स्तर (5.25%) पर बने रहने के कारण भी नए निवेश और लोन लेने की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है।
3. कमोडिटी की कीमतों में अस्थिरता: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को कच्चे माल के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है, जिससे कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन और प्रोडक्शन पर दबाव बना हुआ है।
2. महंगाई दर का झटका: 4.6% से बढ़कर 5.1% होने का अनुमान
आर्थिक विकास दर में गिरावट के अनुमान के साथ ही आरबीआई ने महंगाई के मोर्चे पर भी देश को बड़ा झटका दिया है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई दर के अनुमान में भारी बढ़ोतरी की है।
• पिछला अनुमान: 4.6%
• नया अनुमान: 5.1%
आरबीआई का हमेशा से यह प्रयास रहता है कि महंगाई दर को 4% के आदर्श स्तर के आसपास रखा जाए। लेकिन अनुमान का बढ़कर 5.1% पर पहुंच जाना यह साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में आम जनता को दाल, तेल, सब्जियों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों से राहत मिलने की उम्मीद बेहद कम है।
महंगाई बढ़ने की बड़ी वजहें:
• मौसम का मिजाज और खाद्य कीमतें: अल-नीनो या बेमौसम बारिश के कारण फसलों को होने वाले नुकसान ने खाद्य सुरक्षा और कीमतों को प्रभावित किया है। सब्जियों और अनाजों की कीमतों में लगातार हो रहा उतार-चढ़ाव इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह है।
• महंगा क्रूड ऑयल और इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक स्तर पर होने वाली कोई भी बढ़ोतरी घरेलू बाजार में माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स को महंगा कर देती है।
3. अर्थव्यवस्था के लिए 'स्टैगफ्लेशन' जैसी स्थिति का डर?
आर्थिक जानकारों के मुताबिक, जब किसी देश की विकास दर घट रही हो और उसी समय महंगाई दर बढ़ रही हो, तो यह अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति होती है। इसे अर्थशास्त्र की भाषा में आंशिक रूप से 'स्टैगफ्लेशन' के शुरुआती संकेत के रूप में देखा जाता है।
आरबीआई के सामने अब दोहरी चुनौती है:
• यदि वह विकास दर को बढ़ाने के लिए ब्याज दरें घटाता है, तो बाजार में नकदी बढ़ेगी, जिससे महंगाई और बेकाबू हो सकती है।
• यदि वह महंगाई को रोकने के लिए रुख को और कड़ा करता है या ब्याज दरें बढ़ाता है, तो लोन महंगे हो जाएंगे और जीडीपी ग्रोथ रेट में और गिरावट आ सकती है।
यही वजह है कि गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखते हुए 'रुको और देखो' की नीति अपनाई है।
4. आम आदमी और निवेशकों पर इसका क्या होगा असर?
आरबीआई के इन बदले हुए अनुमानों का सीधा असर शेयर बाजार, निवेशकों और आम उपभोक्ताओं पर देखने को मिलेगा:
अ) आम उपभोक्ता
महंगाई दर का अनुमान 5.1% होने का मतलब है कि आपके घर का मासिक बजट अभी और बिगड़ सकता है। रसोई के सामान से लेकर रोजमर्रा की अन्य सेवाएं महंगी बनी रहेंगी। चूंकि रेपो रेट में कोई कटौती नहीं हुई है, इसलिए लोन की ईएमआई (EMI) कम होने की उम्मीद भी फिलहाल टूट गई है।
ब) शेयर बाजार और कॉर्पोरेट सेक्टर
जीडीपी ग्रोथ रेट में 0.3% की कटौती से कॉर्पोरेट जगत की कमाई प्रभावित हो सकती है। ऑटो, रियल एस्टेट और एफएमसीजी (FMCG) जैसे सेक्टर्स, जो पूरी तरह से उपभोक्ताओं की मांग पर निर्भर करते हैं, उनके शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
स) विदेशी निवेशक
हालांकि ब्याज दरों को स्थिर रखना विदेशी निवेशकों को पसंद आता है, लेकिन देश की विकास दर का अनुमान घटना उनके सेंटिमेंट को थोड़ा कमजोर कर सकता है। विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में पैसा लगाने से पहले आगामी तिमाहियों के वास्तविक कॉर्पोरेट नतीजों का इंतजार करेंगे।
5. क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई द्वारा अनुमानों में किया गया यह बदलाव देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति का एक पारदर्शी और व्यावहारिक आईना है। केंद्रीय बैंक ने हवा में तीर चलाने के बजाय जमीनी हकीकतों को स्वीकार किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आगामी महीनों में मानसून बेहतर रहता है और त्योहारों के सीजन में ग्रामीण मांग में सुधार आता है, तो वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही तक जीडीपी के आंकड़ों में दोबारा सुधार देखा जा सकता है।
निष्कर्ष
आरबीआई की नई मौद्रिक नीति के तहत जारी ये आंकड़े यह साफ करते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय एक बेहद संभलकर चलने वाले रास्ते पर है। 6.6% की जीडीपी ग्रोथ रेट के साथ भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा, लेकिन 5.1% की महंगाई दर केंद्रीय बैंक और सरकार के लिए आने वाले समय में सबसे बड़ी सिरदर्दी साबित होने वाली है।
