Near Janipur Thana, Phulwari Sharif, Patna
भारतीय रेल में खान-पान की स्वच्छता पर बड़ा सवाल: FSSAI का IRCTC को कड़ा नोटिस
भारतीय रेलवे को देश की जीवनरेखा कहा जाता है, जिसमें हर दिन करोड़ों लोग यात्रा करते हैं। लंबी दूरी की यात्राओं में यात्रियों के खान-पान की जिम्मेदारी मुख्य रूप से 'इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन' (IRCTC) की होती है। लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने ट्रेन में मिलने वाले भोजन की स्वच्छता और गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दुरंतो एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या: 12223) का एक कथित वीडियो इंटरनेट पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें रेलवे कैटरिंग के कर्मचारी चलती ट्रेन के टॉयलेट एरिया (शौचालय के पास) में बर्तन धोते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद देश के खाद्य सुरक्षा नियामक, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए IRCTC को एक कड़ा कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
क्या है पूरा मामला और वायरल वीडियो का सच?
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ यह वीडियो लोकमान्य तिलक टर्मिनस (मुंबई) से एर्नाकुलम के बीच चलने वाली 12223 दुरंतो एक्सप्रेस का बताया जा रहा है।
• वीडियो की सामग्री: वीडियो में देखा जा सकता है कि ट्रेन पैंट्री या कैटरिंग स्टाफ के कुछ कर्मचारी शौचालय के ठीक बाहर स्थित वॉशबेसिन और टॉयलेट एरिया के फर्श का उपयोग खाना परोसने वाले बर्तनों और कड़ाही को धोने के लिए कर रहे हैं।
• जनता का आक्रोश: जैसे ही यह वीडियो एक्स (ट्विटर), फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया, यह तेजी से वायरल हो गया। यात्रियों और आम नागरिकों ने इस पर तीव्र आक्रोश व्यक्त किया। लोगों का कहना है कि जिस भोजन के लिए वे भारी-भरकम राशि चुकाते हैं, उसे इतनी अस्वच्छ और अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में तैयार या साफ किया जा रहा है।
• आधिकारिक पुष्टि का इंतजार: हालांकि, FSSAI और रेलवे बोर्ड दोनों ने स्पष्ट किया है कि इस वीडियो की प्रामाणिकता और इसकी सटीक तारीख की आधिकारिक पुष्टि अभी की जानी बाकी है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
FSSAI का सख्त रुख: "खाद्य सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं"
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी करने वाली सर्वोच्च संस्था FSSAI ने इस घटना को 'खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का गंभीर उल्लंघन' माना है। FSSAI द्वारा उठाए गए कदम और उनकी आपत्तियां निम्नलिखित हैं:
1. IRCTC को तत्काल नोटिस
FSSAI ने IRCTC को नोटिस जारी कर इस पूरी घटना पर तत्काल और विस्तृत जवाब मांगा है। नियामक ने पूछा है कि कैटरिंग स्टाफ द्वारा इस प्रकार की लापरवाही क्यों बरती जा रही थी और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है?
2. स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
FSSAI के अधिकारियों के अनुसार, शौचालय के पास बैक्टीरिया के संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है। यदि उसी क्षेत्र में भोजन के बर्तन धोए जाते हैं, तो वे बर्तन गंभीर रूप से संक्रमित हो सकते हैं। इससे यात्रियों को फूड पॉइजनिंग (खाद्य विषाक्तता), डायरिया, टाइफाइड और गैस्ट्रोएंटेराइटिस जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
"ट्रेन में यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के स्वास्थ्य और जीवन के साथ इस तरह का खिलवाड़ कानूनन अपराध है। खाद्य सुरक्षा मानकों (FSS Act, 2006) के तहत स्वच्छता बनाए रखना अनिवार्य है, चाहे वह कोई रेस्तरां हो या चलती ट्रेन की पैंट्री।" - FSSAI का रुख
IRCTC और रेलवे कैटरिंग के बुनियादी नियम
रेलवे नियमों के मुताबिक, प्रीमियम ट्रेनों जैसे दुरंतो, राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस में कैटरिंग के लिए बेहद कड़े नियम और मानक तय किए गए हैं:
• पैंट्री कार की स्वच्छता: बर्तनों की सफाई और भोजन पकाने का काम केवल पैंट्री कार के भीतर बने निर्धारित सिंक और हाइजीनिक एरिया में ही होना चाहिए।
• कर्मचारियों का प्रशिक्षण: भोजन संभालने वाले सभी कर्मचारियों को साफ-सफाई, ग्लव्स (दस्ताने), और हेडगियर (सिर ढकने की टोपी) पहनने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
• कचरा प्रबंधन: बर्तनों के बचे हुए भोजन या कचरे को टॉयलेट एरिया में फेंकने या वहां साफ करने की सख्त मनाही है।
वायरल वीडियो दिखाता है कि जमीनी स्तर पर इन नियमों की धज्जियां किस कदर उड़ाई जा रही हैं।
रेलवे में खान-पान की गुणवत्ता पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहली बार नहीं है जब भारतीय रेल में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर विवाद हुआ है। इससे पहले भी कई बार कैग की रिपोर्ट और यात्रियों की शिकायतों में निम्नलिखित मुद्दे सामने आते रहे हैं:
1. घटिया सामग्री का उपयोग: कई बार यात्रियों को परोसे जाने वाले भोजन में कीड़े, छिपकली या बाल मिलने की शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।
2. ठेकेदारों की लापरवाही: IRCTC कई ट्रेनों में कैटरिंग का काम निजी वेंडर्स या ठेकेदारों को आउटसोर्स करती है। मुनाफे के चक्कर में ये ठेकेदार अक्सर साफ-सफाई के मानकों और कुशल जनशक्ति पर खर्च करने से बचते हैं।
3. निगरानी तंत्र की कमी: चलती ट्रेनों में औचक निरीक्षण की कमी के कारण पैंट्री स्टाफ अपनी मनमानी करता है।
निष्कर्ष
FSSAI द्वारा खुद संज्ञान लेकर नोटिस जारी करना एक सकारात्मक और स्वागत योग्य कदम है। इससे यह संदेश जाता है कि देश के नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा कोई भी मामला, चाहे वह सोशल मीडिया के माध्यम से ही क्यों न सामने आया हो, नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
