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सुबह-सुबह महंगाई का एक और झटका: मुंबई में CNG ₹2 प्रति किलो महंगी
महानगरों में रहने वाले आम आदमी के लिए सुबह की शुरुआत एक बार फिर जेब ढीली करने वाली खबर के साथ हुई है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और उसके आस-पास के सैटेलाइट शहरों (ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली) में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की सीधी बढ़ोतरी कर दी गई है। यह नई दरें आज सुबह से ही खुदरा विक्रय मूल्य (RSP) पर लागू हो चुकी हैं।
गैस वितरण कंपनियों द्वारा अचानक की गई इस बढ़ोतरी ने मध्यम वर्ग, दैनिक यात्रियों और कमर्शियल वाहन चालकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। पहले से ही आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से जूझ रही जनता के लिए ईंधन के दामों में यह इजाफा 'करेला और नीम चढ़ा' जैसा साबित हो रहा है।
लगातार बढ़ते दाम: आखिर क्यों महंगी हो रही है सीएनजी?
यह कोई पहला मौका नहीं है जब सीएनजी के दामों में इस तरह की वृद्धि देखी गई है। पिछले कुछ समय से सीएनजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का एक सिलसिला चल पड़ा है। प्राकृतिक गैस के इस तरह महंगे होने के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं:
• अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता: वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक गैस की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। भारत अपनी जरूरत की अधिकांश गैस आयात करता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतों का सीधा असर हमारे घरेलू बाजार पर पड़ता है।
• घरेलू गैस के आवंटन में कमी: शहर गैस वितरण कंपनियों को मिलने वाली सस्ती घरेलू गैस के कोटे में समय-समय पर कटौती की जाती है। इसकी भरपाई के लिए कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगी एलएनजी (LNG) खरीदनी पड़ती है, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर डाला जाता है।
• सप्लाई चेन और परिचालन लागत: गैस को रिफाइन करने, पाइपलाइनों के जरिए ट्रांसपोर्ट करने और फिलिंग स्टेशनों तक पहुंचाने की परिचालन लागत में भी बढ़ोतरी हुई है।
आम जनता पर चौतरफा मार: बजट हुआ बेपटरी
ईंधन की कीमतों में होने वाली किसी भी वृद्धि का सीधा और सबसे ज्यादा असर समाज के निचले और मध्यम वर्ग पर पड़ता है। सीएनजी को लंबे समय तक एक 'किफायती और पर्यावरण-अनुकूल' ईंधन के रूप में देखा जाता रहा है, जिसके कारण लाखों लोगों ने अपनी कारों को सीएनजी में कन्वर्ट कराया था। लेकिन अब यह भरोसा डगमगा रहा है।
1. ऑटो और टैक्सी के किराए में भारी उछाल
मुंबई और उसके आस-पास के इलाकों की लाइफलाइन माने जाने वाले ऑटो-रिक्शा और काली-पीली टैक्सी (साथ ही ओला-उबर जैसी कैब सेवाएं) पूरी तरह सीएनजी पर निर्भर हैं। ₹2 की इस ताजा बढ़ोतरी के बाद:
• न्यूनतम किराए में वृद्धि: ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने तुरंत प्रभाव से अपने किराए के टैरिफ में संशोधन की मांग शुरू कर दी है, और कई रूटों पर फेयर (किराया) बढ़ भी गए हैं।
• दैनिक यात्रियों पर बोझ: लोकल ट्रेनों के बाद मुंबईकर सबसे ज्यादा ऑटो-टैक्सी का इस्तेमाल करते हैं। किराए में हुई इस बढ़ोतरी से दफ्तर और कॉलेज आने-जाने वाले आम लोगों का मासिक यात्रा बजट अचानक 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गया है।
2. आवश्यक वस्तुओं के दामों पर असर
सीएनजी का उपयोग केवल व्यक्तिगत कारों या ऑटो में नहीं होता, बल्कि मुंबई और उपनगरों में कूरियर, ई-कॉमर्स डिलीवरी और छोटी कमर्शियल गाड़ियों (जैसे टेम्पो और पिकअप वैन) में भी बड़े पैमाने पर होता है। परिवहन लागत बढ़ने से दूध, सब्जियां, फल और अन्य रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में भी आने वाले दिनों में तेजी देखने को मिल सकती है।
ऑटो-टैक्सी यूनियनों का रुख और आंदोलन की सुगबुगाहट
इस बढ़ोतरी पर मुंबई की प्रमुख ऑटो और टैक्सी चालक यूनियनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। यूनियनों का कहना है कि वे पहले से ही महंगाई और कमर्शियल परमिट की बढ़ती फीस से परेशान हैं। ऐसे में सीएनजी का महंगा होना उनके पेट पर लात मारने जैसा है।
• किराया बढ़ाने का दबाव: यूनियनों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार या तेल कंपनियां इस मूल्य वृद्धि को वापस नहीं लेती हैं, तो वे परिवहन विभाग के पास आधिकारिक तौर पर प्रति किलोमीटर किराया बढ़ाने का प्रस्ताव भेजेंगे।
• हड़ताल की चेतावनी: कुछ छोटे संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि लगातार बढ़ती कीमतों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो चालक सड़कों पर उतरने और चक्का जाम करने के लिए मजबूर होंगे, जिससे मुंबई की रफ्तार थम सकती है।
निष्कर्ष
सुबह-सुबह लगी महंगाई की यह चोट केवल 2 रुपये की सामान्य वृद्धि नहीं है, बल्कि यह एक बड़े आर्थिक असंतोष का संकेत है। सरकार को यह समझना होगा कि सीएनजी अब केवल एक वैकल्पिक ईंधन नहीं, बल्कि सार्वजनिक परिवहन और आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी का मुख्य आधार बन चुकी है। ऐसे में वितरण कंपनियों की मनमर्जी पर लगाम लगाना और टैक्स दरों को तर्कसंगत बनाना बेहद जरूरी है, ताकि आम आदमी को इस बेकाबू होती महंगाई से कुछ राहत मिल सके।
