• aayushfoundation@navnews.in

पेट्रोल-डीजल के बाद CNG भी महंगा

15-05-2026

ईरान संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल का सीधा असर अब भारतीय आम आदमी की जेब पर पड़ने लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि के ठीक बाद, देश की प्रमुख तेल और गैस कंपनियों ने सीएनजी की कीमतों में भी इजाफा कर दिया है।

महंगाई की यह दोहरी मार मध्यम वर्ग और परिवहन क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका है। आइए इस पूरे संकट, कीमतों के नए गणित और इसके व्यापक आर्थिक प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण करते हैं:

1. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल

पिछले कुछ दिनों से वैश्विक तनाव के कारण ईंधन की कीमतों में वृद्धि की आशंका जताई जा रही थी। तेल कंपनियों ने अंततः ईंधन की दरों में संशोधन किया है:

• पेट्रोल: देशभर में पेट्रोल की कीमतों में 3.14 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है।

• डीजल: डीजल के दामों में 3.11 रुपए प्रति लीटर का इजाफा हुआ है।

डीजल की कीमतों में यह वृद्धि विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि भारत में माल ढुलाई मुख्य रूप से डीजल पर निर्भर है। डीजल महंगा होने का सीधा मतलब है कि आने वाले दिनों में फल, सब्जियां और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि देखी जाएगी।

2. सीएनजी पर महंगाई की मार

पेट्रोल और डीजल के बाद, वैकल्पिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी को भी महंगा कर दिया गया है। तेल कंपनियों ने देशभर में सीएनजी के दाम 2 रुपए प्रति किलोग्राम बढ़ा दिए हैं।

दिल्ली में नए रेट:

देश की राजधानी दिल्ली, जहाँ सीएनजी का सबसे बड़ा नेटवर्क है, वहाँ अब सीएनजी की नई दरें 79.09 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई हैं। इससे पहले दिल्ली में दरें 77.09 रुपए के आसपास थीं। दिल्ली के अलावा नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में भी कीमतों में इसी अनुपात में वृद्धि देखी गई है।

3. ईरान संकट: कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण

ईंधन की कीमतों में इस अचानक उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण ईरान संकट और मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव है।

• सप्लाई चेन पर असर: ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में से एक है और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर उसका प्रभाव है। तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने का डर बना हुआ है।

• कच्चे तेल के दाम: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 90-95 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने की संभावना है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में मामूली बदलाव भी घरेलू बाजार में बड़ा असर डालता है।

• रुपए की कमजोरी: वैश्विक अस्थिरता के कारण डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत में गिरावट भी तेल आयात को महंगा बना रही है।

4. आम आदमी और परिवहन क्षेत्र पर प्रभाव

ईंधन की कीमतों में इस "ट्रिपल अटैक" (पेट्रोल, डीजल और सीएनजी) का असर समाज के हर वर्ग पर पड़ेगा:

क. ऑटो और कैब चालकों का संकट

दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में हजारों ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और बसें सीएनजी पर चलती हैं। सीएनजी के दाम बढ़ने से चालकों की दैनिक कमाई कम हो जाएगी। संभावना है कि आने वाले दिनों में ओला, उबर जैसी कंपनियां और ऑटो यूनियन किराए में वृद्धि की मांग करेंगे।

ख. रसद और माल ढुलाई डीजल की कीमतों में 3 रुपए से ज्यादा की बढ़ोतरी माल ढुलाई की लागत को 5-8% तक बढ़ा सकती है। इसका असर कारखानों से लेकर रिटेल स्टोर तक पहुँचने वाले हर सामान पर पड़ेगा।

ग. घरेलू बजट पर असर

खाद्य तेल, दालें और राशन की ढुलाई महंगी होने से आम गृहणियों का मासिक बजट बिगड़ना तय है। महंगाई दर में इसके कारण उछाल आने की पूरी संभावना है।

5. क्या और बढ़ेंगी कीमतें?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान संकट जल्द नहीं सुलझा, तो तेल कंपनियां आने वाले हफ्तों में फिर से कीमतों में संशोधन कर सकती हैं। तेल कंपनियां लंबे समय से अपने 'अंडर-रिकवरी' (लागत से कम पर बिक्री) को कवर करने की कोशिश कर रही हैं, और वर्तमान वैश्विक स्थिति उन्हें कीमतें बढ़ाने का आधार प्रदान कर रही है।

6. निष्कर्ष

ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी एक ऐसे समय में आई है जब अर्थव्यवस्था रिकवरी की राह पर है। पेट्रोल का 3.14 रुपए और सीएनजी का 2 रुपए महंगा होना केवल सांख्यिकीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की क्रय शक्ति पर सीधा प्रहार है।

Share This News On Social Media

Facebook Comments

Related News