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BPSC पेपर लीक केस: संजीव मुखिया गिरोह पर शिकंजा, पटना से विपुल शर्मा गिरफ्तार

06-01-2026

BPSC पेपर लीक केस: संजीव मुखिया गिरोह पर शिकंजा, पटना से विपुल शर्मा गिरफ्तार

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3) के पेपर लीक मामले ने राज्य की पूरी शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले की जांच कर रही आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए मुख्य सरगना संजीव मुखिया गिरोह के सक्रिय सदस्य विपुल शर्मा को पटना से दबोच लिया है।

यह गिरफ्तारी न केवल इस गिरोह के काम करने के तरीके (Modus Operandi) का खुलासा करती है, बल्कि यह भी बताती है कि बिहार में पेपर लीक का सिंडिकेट कितना गहरा और संगठित है।

कैसे हुई गिरफ्तारी और क्या मिले सुराग?

विपुल शर्मा लंबे समय से EOU की रडार पर था। वह पटना में छिपकर गिरोह की गतिविधियों को आगे बढ़ा रहा था।

 * मुखबिर की सूचना: सटीक सूचना के आधार पर EOU की विशेष टीम ने पटना के एक गुप्त ठिकाने पर छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया।

 * पूछताछ में खुलासे: विपुल शर्मा ने स्वीकार किया कि वह संजीव मुखिया गिरोह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उसका काम अभ्यर्थियों (Candidates) से संपर्क करना, उन्हें पेपर का झांसा देना और उनसे मोटी रकम वसूलने की डील फाइनल करना था।

 * नेटवर्क का विस्तार: पूछताछ में कई ऐसे 'सेटिंग गेटिंग' सेंटरों और अन्य गुर्गों के नाम सामने आए हैं, जो अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

संजीव मुखिया गिरोह: पेपर लीक का 'मास्टरमाइंड'

संजीव मुखिया, जिसका नाम केवल BPSC ही नहीं, बल्कि NEET पेपर लीक विवाद में भी प्रमुखता से आया था, इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड माना जाता है।

 * पैसों का खेल: यह गिरोह प्रति अभ्यर्थी 10 लाख से 25 लाख रुपये तक वसूलता था।

 * 'रटने' का सुरक्षित ठिकाना: परीक्षा से एक दिन पहले अभ्यर्थियों को हजारीबाग या अन्य गुप्त स्थानों पर ले जाया जाता था, जहाँ उन्हें मोबाइल फोन जमा करवाकर प्रश्न-पत्र रटवाए जाते थे।

 * अब तक की कार्रवाई: मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक इस केस में 289 अभियुक्तों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।

BPSC TRE-3: एक रद्द परीक्षा की कहानी

बता दें कि 15 मार्च 2024 को आयोजित हुई BPSC शिक्षक भर्ती परीक्षा (तीसरे चरण) को पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद रद्द कर दिया गया था।

 * हजारीबाग कनेक्शन: परीक्षा से पहले ही हजारीबाग के एक कोहिनूर होटल और मैरिज हॉल से सैकड़ों अभ्यर्थियों को पकड़ा गया था, जिनके पास से लीक प्रश्न-पत्र बरामद हुए थे।

 * अभ्यर्थियों का आक्रोश: इस घोटाले ने लाखों योग्य उम्मीदवारों के भविष्य को अधर में लटका दिया था। हालांकि सरकार ने दोबारा परीक्षा आयोजित की, लेकिन मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी अभी भी प्राथमिकता बनी हुई है।

EOU की अगली रणनीति: "सफाई अभियान"

आर्थिक अपराध इकाई के महानिदेशक के अनुसार, विपुल शर्मा की गिरफ्तारी से गिरोह के वित्तीय लेनदेन (Money Trail) की जानकारी मिली है।

 * छापेमारी जारी: संजीव मुखिया और उसके करीबी सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में छापेमारी की जा रही है।

 * संपत्ति की कुर्की: जांच एजेंसियां उन आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया भी शुरू कर रही हैं जो फरार चल रहे हैं।

 * डिजिटल सबूत: गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल और लैपटॉप से मिले डेटा को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेपर लीक का स्रोत (Source) प्रिंटिंग प्रेस था या कोई विभागीय कर्मचारी।

निष्कर्ष

विपुल शर्मा की गिरफ्तारी BPSC पेपर लीक केस की गुत्थी सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी बरकरार है—संजीव मुखिया कब पकड़ा जाएगा? जब तक इस सिंडिकेट के 'फन' को पूरी तरह नहीं कुचला जाता, तब तक भविष्य की परीक्षाओं की पारदर्शिता पर संदेह के बादल मंडराते रहेंगे।

बिहार के लाखों छात्र उम्मीद कर रहे हैं कि EOU इस बार जांच को उसके तार्किक अंत तक ले जाएगी और दोषियों को ऐसी सजा मिलेगी जो भविष्य के लिए एक नजीर बने।


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