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AAP सांसद ने की मोदी सरकार की तारीफ

04-01-2026

भारतीय राजनीति में अक्सर पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक ही देखने को मिलती है, लेकिन हाल ही में एक ऐसा मौका आया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने केंद्र की मोदी सरकार के एक कदम की खुलकर सराहना की। मामला देश के लाखों गिग वर्कर्स (Gig Workers) और डिलीवरी पार्टनर्स की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा है।

राघव चड्ढा ने केंद्र सरकार द्वारा नए लेबर कोड के तहत जारी किए गए 'सोशल सिक्योरिटी नियमों के ड्राफ्ट' का स्वागत करते हुए इसे "एक महत्वपूर्ण जीत" करार दिया है।

राघव चड्ढा का बयान: "मान्यता, सुरक्षा और सम्मान की जीत"

सांसद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक वीडियो संदेश और पोस्ट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा:

> "सभी गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स को बधाई। आपके लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार के सोशल सिक्योरिटी नियमों का ड्राफ्ट आपके काम को मान्यता, सुरक्षा और सम्मान देने की दिशा में पहला कदम है। भले ही Zomato, Swiggy और Blinkit जैसे प्लेटफॉर्म्स ने आपकी आवाज नहीं सुनी, लेकिन देश के लोगों और सरकार ने सुनी।"

चड्ढा ने इसे एक 'छोटी लेकिन महत्वपूर्ण जीत' बताते हुए कहा कि यह बदलाव केवल उनके संसद में मुद्दा उठाने से नहीं, बल्कि उन लाखों मजदूरों के संघर्ष और आवाज उठाने से संभव हुआ है जो धूप, बरसात और कड़ाके की ठंड में हमारे दरवाजे तक सामान पहुंचाते हैं।

क्या है नए नियमों का ड्राफ्ट? (आसान भाषा में)

केंद्र सरकार ने 'सोशल सिक्योरिटी कोड 2020' के तहत इन नियमों का मसौदा तैयार किया है। राघव चड्ढा ने इन जटिल नियमों को आम मजदूरों के लिए सरल भाषा में समझाया:

 * कानूनी पहचान: अब गिग वर्कर्स को केवल 'पार्टनर' नहीं, बल्कि कानूनी रूप से 'वर्कर' की पहचान मिलेगी।

 * यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN): हर गिग वर्कर का सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा, जिससे उन्हें एक विशिष्ट डिजिटल आईडी और UAN मिलेगा।

 * पात्रता (Eligibility): यदि कोई वर्कर साल में कम से कम 90 दिन किसी एक प्लेटफॉर्म (जैसे Swiggy) के साथ या 120 दिन अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के साथ काम करता है, तो वह सामाजिक सुरक्षा लाभों का हकदार होगा।

 * सोशल सिक्योरिटी फंड: कंपनियों (Aggregators) को अपनी कमाई का एक निश्चित हिस्सा इस सरकारी फंड में देना होगा, जिसका उपयोग वर्कर्स के स्वास्थ्य, दुर्घटना बीमा और वृद्धावस्था सुरक्षा के लिए किया जाएगा।

संसद से सड़क तक राघव चड्ढा की पैरवी

यह सराहना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ महीनों से राघव चड्ढा लगातार गिग वर्कर्स के अधिकारों के लिए मुखर रहे हैं।

 * संसद में मुद्दा: हालिया सत्र में उन्होंने गिग वर्कर्स की "पीड़ा और दुर्दशा" का जिक्र करते हुए उन्हें 'भारतीय अर्थव्यवस्था के अदृश्य पहिए' कहा था।

 * 10 मिनट डिलीवरी का विरोध: उन्होंने '10-मिनट डिलीवरी' मॉडल की आलोचना करते हुए कहा था कि ये कंपनियां एल्गोरिदम के जरिए इंसानों को रोबोट की तरह इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है।

 * हड़ताल का समर्थन: नए साल की पूर्व संध्या पर जब डिलीवरी पार्टनर्स ने हड़ताल की थी, तब राघव चड्ढा ने उनके साथ बैठकर उनकी समस्याओं को सुना था और कंपनियों को 'शोषणकारी मॉडल' बंद करने की चेतावनी दी थी।

राजनीतिक निहितार्थ: एक सकारात्मक विपक्ष की भूमिका

अक्सर विपक्षी नेता सरकार की हर नीति का विरोध करते हैं, लेकिन राघव चड्ढा द्वारा मोदी सरकार के इस ड्राफ्ट की तारीफ करना एक 'मैच्योर पॉलिटिक्स' का उदाहरण माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे स्टार्टअप्स और बिजनेस के विरोधी नहीं हैं, लेकिन 'शोषण' के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, "सुरक्षा कोई विशेषाधिकार नहीं है, सम्मान कोई उपकार नहीं है और सामाजिक सुरक्षा कोई दान नहीं है।"

आगे की राह

अभी ये नियम 'ड्राफ्ट' (मसौदा) के रूप में हैं, जिस पर सरकार ने हितधारकों (Stakeholders) से सुझाव मांगे हैं। राघव चड्ढा ने वर्कर्स से अपील की है कि वे इस जीत को अंतिम न मानें और यह सुनिश्चित करें कि ये नियम कागजों से निकलकर जमीन पर लागू हों।



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