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10 वर्षों का रिपोर्ट कार्ड: 40 लाख परिवारों का सपना पूरा

23-01-2026

बिहार में 'हर गरीब को छत' देने के मिशन में नीतीश सरकार ने एक बड़ा लक्ष्य साझा किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-G) की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, सरकार अब राज्य के उन 12 लाख परिवारों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जो अभी भी पक्के मकान की प्रतीक्षा में हैं।

10 वर्षों का रिपोर्ट कार्ड: 40 लाख परिवारों का सपना पूरा

बिहार में ग्रामीण आवास निर्माण की रफ्तार पिछले कुछ वर्षों में देश के शीर्ष राज्यों में रही है।

 * सफलता का आंकड़ा: 2016-17 से अब तक कुल 39,49,743 (करीब 40 लाख) पक्के घर बनाकर गरीबों को सौंपे जा चुके हैं।

 * कुल निवेश: इन मकानों के निर्माण पर सरकार ने अब तक ₹53,952 करोड़ की भारी-भरकम राशि खर्च की है।

 * महिला सशक्तिकरण: इन आवासों का आवंटन मुख्य रूप से परिवार की महिला मुखिया के नाम पर किया गया है, जिससे ग्रामीण समाज में उनकी स्थिति मजबूत हुई है।

अगला लक्ष्य: 12 लाख नए घर

नीतीश सरकार ने साफ कर दिया है कि राज्य में कोई भी परिवार बेघर नहीं रहेगा।

 * शेष लक्ष्य: सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 12 लाख परिवार ऐसे चिन्हित किए गए हैं जो पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं लेकिन अभी तक योजना का लाभ नहीं ले पाए हैं।

 * प्राथमिकता: नए चरण में उन लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है जो भूमिहीन हैं (जिन्हें सरकार पहले जमीन खरीदने के लिए ₹60,000 की सहायता भी दे रही है) और जो अत्यंत पिछड़े वर्गों से आते हैं।

 * समय सीमा: सरकार का प्रयास है कि अगले 2-3 वर्षों के भीतर इन सभी स्वीकृत आवासों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए।

आवास योजना के साथ मिलने वाले अतिरिक्त लाभ

पीएम आवास योजना का लाभ केवल मकान तक सीमित नहीं है, इसके साथ अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी 'बंडल' के रूप में मिलता है:

 * स्वच्छ भारत मिशन: शौचालय निर्माण के लिए ₹12,000 की अलग से सहायता।

 * मनरेगा: घर बनाने के दौरान लाभार्थी को 90-95 दिनों की मजदूरी (मजदूर के रूप में) का भुगतान।

 * उज्ज्वला योजना: मुफ्त गैस कनेक्शन की सुविधा।

 * जल जीवन हरियाली: हर घर नल का जल योजना के तहत पानी का कनेक्शन।

चुनौतियां और निगरानी

इतने बड़े स्तर पर निर्माण कार्य में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती रही है। इसके लिए:

 * AwaasSoft: आवास की प्रगति को ट्रैक करने के लिए मोबाइल ऐप और पोर्टल का उपयोग हो रहा है।

 * जियो-टैगिंग: घर के हर चरण (नींव, दीवार और छत) की फोटो अपलोड होने के बाद ही अगली किस्त की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते (DBT) में भेजी जाती है।

निष्कर्ष

40 लाख घरों का निर्माण पूरा होना बिहार जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य के लिए एक मील का पत्थर है। यदि सरकार अगले 12 लाख घरों का लक्ष्य समय पर पूरा कर लेती है, तो बिहार ग्रामीण आवास की समस्या से मुक्त होने वाले अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा।


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