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नीट छात्रा दरिंदगी मामला: न्याय की गुहार और SIT पर उठते सवाल

26-01-2026

पटना में नीट छात्रा के साथ हुई दरिंदगी का मामला अब एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है। जहाँ एक तरफ गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने "अपराधियों पर माला चढ़ाने" जैसे सख्त तेवर दिखाए हैं, वहीं दूसरी तरफ पीड़िता के परिवार का पुलिस की जांच प्रणाली (SIT) से भरोसा उठता नजर आ रहा है।

नीट छात्रा दरिंदगी मामला: न्याय की गुहार और SIT पर उठते सवाल

पटना का यह मामला न केवल एक जघन्य अपराध है, बल्कि यह अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और पीड़ित परिवार के मानसिक उत्पीड़न की कहानी भी बनता जा रहा है। कपड़ों पर मिले साक्ष्यों के बावजूद, जांच की दिशा पर परिजनों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

1. वैज्ञानिक साक्ष्य और विचलित करने वाले तथ्य

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब पीड़िता के कपड़ों की जांच में स्पर्म (Sperm) के निशान मिलने की पुष्टि हुई। यह इस बात का पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण है कि छात्रा के साथ क्रूरता हुई थी। इसके बावजूद, परिजनों का मानना है कि पुलिस इस मुख्य साक्ष्य के आधार पर दोषियों तक पहुँचने के बजाय जांच को भटका रही है।

2. परिजनों का गंभीर आरोप: "हमें ही दोषी माना जा रहा है"

पीड़िता के पिता ने मीडिया के सामने अपना दर्द बयां करते हुए एसआईटी (SIT) की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उनके बयानों से सिस्टम के प्रति गहरी निराशा झलकती है:

 * मानसिक प्रताड़ना: पिता का कहना है कि SIT बार-बार जहानाबाद (उनके निवास स्थान) आकर उनसे ही पूछताछ कर रही है, जिससे ऐसा महसूस होता है जैसे अपराधी वही हों।

 * जांच की दिशा: परिवार का आरोप है कि पुलिस हॉस्टल संचालक और घटना से जुड़े संदिग्धों को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ करने के बजाय, पीड़ितों को ही तंग कर रही है।

 * आत्मघाती कदम की चेतावनी: न्याय न मिलने और पुलिस के व्यवहार से तंग आकर पिता ने यहाँ तक कह दिया कि यदि उन्हें इंसाफ नहीं मिला, तो वे आत्महत्या (Suicide) कर लेंगे।

3. SIT जांच में विसंगतियां

परिजनों की नाराजगी के पीछे कुछ तार्किक कारण नजर आते हैं:

 * मुख्य संदिग्धों से दूरी: हॉस्टल के संचालक और वहां मौजूद अन्य लोगों की भूमिका की गहन जांच में देरी क्यों हो रही है?

 * रिमांड में देरी: संदिग्धों को हिरासत में लेकर सच उगलवाने के बजाय, पीड़ितों से बार-बार एक ही सवाल पूछना जांच की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

 * संवेदनशीलता का अभाव: दुष्कर्म जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ संवेदनशीलता बरती जाए, लेकिन यहाँ परिवार खुद को 'टारगेट' महसूस कर रहा है।

प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत का टकराव

एक तरफ गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने पुलिस को 'खुली छूट' देने और दोषियों के खिलाफ 'माला नहीं मिट्टी' जैसी कठोर कार्रवाई की बात कही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर SIT की कार्यप्रणाली परिवार को असंतुष्ट कर रही है।

वर्तमान स्थिति का विश्लेषण:

| पहलू | स्थिति |

|---|---|

| वैज्ञानिक साक्ष्य | कपड़ों पर स्पर्म के निशान मिलने से जुर्म की पुष्टि। |

| प्रशासनिक रुख | गृहमंत्री द्वारा सख्त कार्रवाई और 'फ्री हैंड' का दावा। |

| परिजनों की स्थिति | गहरा असंतोष, मानसिक दबाव और आत्महत्या की धमकी। |

| जांच की गति | संदिग्धों की जगह पीड़ितों से बार-बार पूछताछ का आरोप। |

निष्कर्ष और आगे की राह

यह मामला अब केवल एक आपराधिक जांच नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार पुलिस की साख की परीक्षा है। यदि वैज्ञानिक साक्ष्यों के बाद भी असली दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती है और पीड़ित परिवार को सुरक्षा के बजाय डर का एहसास होता है, तो यह सिस्टम की बड़ी विफलता मानी जाएगी।

सरकार को चाहिए कि वे SIT की कार्यप्रणाली की निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि जांच का केंद्र 'अपराधी' हों, न कि 'पीड़ित'।


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