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वीर बाल दिवस: PM मोदी का संबोधन
आज पूरा राष्ट्र 26 दिसंबर 2025 को 'वीर बाल दिवस' के रूप में मना रहा है। यह दिन भारत के इतिहास के उन पन्नों को समर्पित है, जो वीरता, त्याग और अटूट विश्वास की गाथा कहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में शिरकत की और देश को संबोधित करते हुए दसवें सिख गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों की शहादत को नमन किया।
1. 'वीर बाल दिवस' का ऐतिहासिक महत्व
वीर बाल दिवस मुख्य रूप से गुरु गोविंद सिंह जी के दो छोटे साहिबजादों—बाबा जोरावर सिंह जी (9 वर्ष) और बाबा फतेह सिंह जी (7 वर्ष)—की महान शहादत की स्मृति में मनाया जाता है।
* शहादत की गाथा: सन् 1704 में सरहिंद के नवाब वजीर खान ने इन मासूम साहिबजादों को इस्लाम धर्म स्वीकार न करने पर जीवित ही दीवार में चुनवा दिया था।
* अटल साहस: इतनी कम उम्र के बावजूद, साहिबजादों ने अपनी आस्था और सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय मृत्यु को गले लगाना बेहतर समझा। उनकी यह वीरता सदियों से भारतीय मूल्यों की रक्षा का प्रतीक रही है।
2. प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन: मुख्य बिंदु
भारत मंडपम में उपस्थित जनसमूह और विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:
* विरासत पर गर्व: PM ने कहा कि वीर बाल दिवस हमें याद दिलाता है कि उम्र मायने नहीं रखती जब बात सिद्धांतों और राष्ट्र की रक्षा की हो। उन्होंने युवाओं से अपनी 'सांस्कृतिक विरासत' पर गर्व करने का आह्वान किया।
* गुलामी की मानसिकता से मुक्ति: उन्होंने जोर दिया कि दशकों तक भारत के वास्तविक नायकों की कहानियों को दबाया गया, लेकिन आज का भारत अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है। साहिबजादों का बलिदान केवल सिख समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा है।
* विकसित भारत का संकल्प: प्रधानमंत्री ने कहा कि "विकसित भारत" के निर्माण की जिम्मेदारी आज के बच्चों के कंधों पर है, और साहिबजादों का जीवन उन्हें विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहना सिखाता है।
3. राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेताओं से संवाद
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेताओं से भी विशेष मुलाकात की।
* प्रतिभा का सम्मान: कला, संस्कृति, बहादुरी, नवाचार, समाज सेवा और खेल जैसे क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाले बच्चों को PM ने प्रोत्साहित किया।
* भविष्य के पथ-प्रदर्शक: बच्चों से बात करते हुए उन्होंने उनके अनुभवों को सुना और उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे 'नवाचार' (Innovation) को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं ताकि देश वैश्विक मंच पर अग्रणी बना रहे।
4. देशभर में कार्यक्रमों की गूंज
केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि देशभर में आज 'वीर बाल दिवस' पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं:
* डिजिटल प्रदर्शनी: स्कूलों और कॉलेजों में साहिबजादों के जीवन पर आधारित डिजिटल प्रदर्शनियां दिखाई जा रही हैं।
* प्रतियोगिताएं: बच्चों के बीच निबंध लेखन, चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं के माध्यम से इस दिन के महत्व को साझा किया जा रहा है।
* नगर कीर्तन: कई राज्यों में विशेष नगर कीर्तन और कीर्तन दरबार आयोजित किए गए हैं, जहाँ गुरुबाणी के माध्यम से साहिबजादों को श्रद्धांजलि दी जा रही है।
5. सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव
2022 में प्रधानमंत्री द्वारा इस दिन की घोषणा किए जाने के बाद से, 'वीर बाल दिवस' ने भारतीय समाज में एक नई चेतना जगाई है।
* नई पीढ़ी को जोड़ना: यह दिन आज की 'डिजिटल जेनरेशन' को उन बलिदानों से जोड़ता है जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखा।
* एक भारत, श्रेष्ठ भारत: साहिबजादों की कहानी उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक एकता का संदेश देती है।
