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बिहार विधानसभा: विपक्ष के आक्रामक तेवर और NEET कांड की गूँज
बिहार विधानसभा का बजट सत्र शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तलवारें खिंच गई हैं। राजद विधायक भाई वीरेंद्र का यह बयान कि "NEET छात्रा मौत मामले में NDA के बड़े नेताओं के परिवार का हाथ है," न केवल गंभीर है बल्कि आने वाले दिनों में सदन के भीतर बड़े हंगामे का संकेत दे रहा है।
बिहार विधानसभा: विपक्ष के आक्रामक तेवर और NEET कांड की गूँज
बिहार में बजट सत्र की शुरुआत शांतिपूर्ण होने के बजाय आरोपों की बौछार के साथ हुई है। मुख्य विपक्षी दल राजद (RJD) ने साफ कर दिया है कि वह सरकार को केवल विकास के मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि संवेदनशील आपराधिक मामलों और कथित भ्रष्टाचार पर भी घेरने के लिए तैयार है।
1. भाई वीरेंद्र का 'विस्फोटक' आरोप
राजद के कद्दावर नेता भाई वीरेंद्र ने सत्र के पहले ही दिन सीधे तौर पर सत्ताधारी एनडीए (NDA) के बड़े नेताओं को निशाने पर लिया है। उनके आरोपों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
* नेताओं की संलिप्तता: उन्होंने आरोप लगाया कि NEET छात्रा की मौत का मामला कोई साधारण घटना नहीं है, बल्कि इसमें सत्ता पक्ष से जुड़े रसूखदार परिवारों का हाथ है।
* सरकार की चुप्पी: विधायक के अनुसार, सरकार इस मामले में इसलिए 'असमंजस' में है क्योंकि अपनों को बचाना उसकी मजबूरी बन गई है।
* नैतिक घेराबंदी: भाई वीरेंद्र ने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस मुद्दे को दबाने नहीं देगा और सरकार को 'कटघरे में खड़ा' करेगा।
2. NEET छात्रा मौत मामला: एक संवेदनशील मुद्दा
NEET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत ने बिहार में छात्र राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
* जनता का आक्रोश: युवाओं और छात्रों के बीच इस मुद्दे को लेकर पहले से ही काफी गुस्सा है।
* सियासी हथियार: विपक्ष इस घटना को "बेटी बचाओ" के नारे के खिलाफ सरकार की विफलता के रूप में पेश कर रहा है।
3. सत्र के दौरान अन्य संभावित मुद्दे
भाई वीरेंद्र ने साफ किया है कि राजद केवल इसी मुद्दे तक सीमित नहीं रहेगी। सदन में निम्नलिखित विषयों पर भी तकरार होने के आसार हैं:
* विशेष राज्य का दर्जा: बिहार को विशेष दर्जा दिलाने की मांग पर एक बार फिर बहस छिड़ सकती है।
* बेरोजगारी और बजट: कल पेश होने वाले बजट से पहले विपक्ष ने सरकार की 'गलत आर्थिक नीतियों' को मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है।
* कानून-व्यवस्था: राज्य में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर विपक्ष सरकार के सुशासन के दावों पर सवाल उठाएगा।
4. सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा
इन गंभीर व्यक्तिगत और राजनीतिक आरोपों के बाद अब सबकी नजरें इस पर हैं कि मुख्यमंत्री और एनडीए के अन्य नेता सदन के भीतर इस पर क्या सफाई देते हैं। आमतौर पर ऐसे मामलों में सत्ता पक्ष इसे 'जांच का विषय' बताकर टालने की कोशिश करता है, लेकिन सीधे परिवारवाद के आरोपों ने मामले को व्यक्तिगत बना दिया है।
निष्कर्ष
भाई वीरेंद्र के बयान ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि 2026-27 का यह बजट सत्र केवल आंकड़ों का खेल नहीं होगा, बल्कि इसमें भारी राजनीतिक उठापटक और तीखी नोकझोंक देखने को मिलेगी। जनता के हितों के बहाने विपक्ष सरकार की साख पर प्रहार करने की पूरी तैयारी में है।
