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पिनाका LRGR-120 का सफल परीक्षण: भारतीय सेना की मारक क्षमता में '120 किलोमीटर' का नया अध्याय
चांदीपुर (ओडिशा), 30 दिसंबर 2025: भारतीय रक्षा क्षेत्र ने साल 2025 का अंत एक ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ किया है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने सोमवार (29 दिसंबर) को ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से 'पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट' (Pinaka LRGR-120) का पहला सफल उड़ान परीक्षण (Maiden Flight Test) संपन्न किया।
यह परीक्षण न केवल तकनीकी दृष्टि से सफल रहा, बल्कि इसने दुश्मन के ठिकानों को 120 किलोमीटर की दूरी से सटीक निशाना बनाने की भारत की क्षमता को पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है।
परीक्षण की मुख्य विशेषताएं: 'टेक्स्टबुक प्रिसिजन'
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, सोमवार को हुए इस परीक्षण के दौरान रॉकेट ने अपनी अधिकतम 120 किलोमीटर की रेंज को छुआ। परीक्षण के दौरान रॉकेट ने हवा में वे सभी पैंतरे (Manoeuvres) दिखाए जो मिशन के लिए तय किए गए थे।
* अचूक सटीकता: रॉकेट ने अपने निर्धारित लक्ष्य पर 'टेक्स्टबुक प्रिसिजन' (सटीक निशाना) के साथ प्रहार किया।
* ट्रैकिंग और डेटा: चांदीपुर रेंज में तैनात रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम और टेलीमेट्री स्टेशनों ने पूरी उड़ान के दौरान रॉकेट के प्रक्षेपवक्र (Trajectory) पर पैनी नजर रखी और डेटा एकत्र किया।
* लॉन्चर की बहुमुखी प्रतिभा: इस रॉकेट को भारतीय सेना में पहले से मौजूद 'इन-सर्विस' पिनाका लॉन्चर से ही दागा गया। यह साबित करता है कि मौजूदा सिस्टम को बदले बिना ही सेना अपनी मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा सकती है।
तकनीकी बारीकियां: क्यों खास है LRGR-120?
पिनाका रॉकेट प्रणाली का विकास पुणे स्थित ARDE (आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट) ने HEMRL, DRDL और RCI जैसे प्रमुख डीआरडीओ लैब के सहयोग से किया है।
* गाइडेड तकनीक: पुराने पिनाका वेरिएंट्स काफी हद तक अनगाइडेड थे, लेकिन LRGR-120 एक उन्नत 'गाइडेंस पैकेज' से लैस है। इसमें इनर्शियल नेविगेशन के साथ-साथ मिड-कोर्स अपडेट और टर्मिनल सुधार (Terminal Correction) की सुविधा है, जो इसे अंतिम क्षणों में भी लक्ष्य की ओर सटीक रूप से मुड़ने में मदद करती है।
* मारक क्षमता में विस्तार: पिनाका मार्क-1 की रेंज 40 किलोमीटर थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 75-80 किलोमीटर (मार्क-2) किया गया। अब 120 किलोमीटर की रेंज के साथ यह रॉकेट दुश्मन के कमांड सेंटर्स, रडार स्टेशनों और रसद डिपो को सीमा के काफी पीछे से तबाह करने में सक्षम है।
* स्वदेशी गौरव: यह पूरी तरह से 'मेक इन इंडिया' की भावना के अनुरूप है। इसका विकास और सफल परीक्षण भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
सेना के लिए 'गेम चेंजर' और रणनीतिक महत्व
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर डीआरडीओ को बधाई देते हुए इसे सशस्त्र बलों के लिए "गेम चेंजर" बताया है। भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी संकेत दिया है कि पिनाका के इस लंबी दूरी के वेरिएंट के तैयार होने के बाद, सेना अन्य वैकल्पिक विदेशी हथियारों की खरीद के बजाय पूरी तरह से स्वदेशी पिनाका रेजिमेंटों पर भरोसा करेगी।
रणनीतिक लाभ:
* स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक: 120 किलोमीटर की दूरी का मतलब है कि भारतीय तोपखाना अपनी अग्रिम पंक्तियों को खतरे में डाले बिना दुश्मन के गहरे ठिकानों को निशाना बना सकता है।
* पर्वतीय युद्ध: पिनाका सिस्टम अपनी गतिशीलता (Mobility) के लिए जाना जाता है। भारी चीनी आर्टिलरी के मुकाबले पिनाका को ऊंचे पहाड़ी इलाकों में तैनात करना और हटाना अधिक आसान है।
एक ही दिन में दोहरी उपलब्धि
दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन (29 दिसंबर) इस रॉकेट का सफल परीक्षण हुआ, उसी दिन दोपहर में रक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने ₹79,000 करोड़ के सैन्य खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी। इन प्रस्तावों में पिनाका सिस्टम के लिए लंबी दूरी के गाइडेड रॉकेटों की खरीद भी शामिल थी। परीक्षण की सफलता ने तुरंत ही इस फैसले पर मुहर लगा दी।
निष्कर्ष
पिनाका LRGR-120 का सफल परीक्षण भारतीय आर्टिलरी (तोपखाना) के आधुनिकीकरण में एक मील का पत्थर है। भगवान शिव के धनुष 'पिनाका' के नाम पर रखा गया यह हथियार तंत्र अब 120 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन के लिए काल साबित होगा। यह परीक्षण न केवल डीआरडीओ की तकनीकी श्रेष्ठता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में 'पिनाका' के निर्यात की संभावनाओं को भी मजबूती प्रदान करता है।
