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लालू यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका: IRCTC घोटाले में ट्रायल पर रोक से इनकार
लालू यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका: IRCTC घोटाले में ट्रायल पर रोक से इनकार
बिहार की राजनीति के दिग्गज और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के लिए नए साल की शुरुआत कानूनी मोर्चे पर अच्छी नहीं रही है। 5 जनवरी 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने IRCTC घोटाले से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए लालू यादव को किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत में चल रहे ट्रायल (मुकदमे) पर रोक लगाने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया, जिससे यादव परिवार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
हाईकोर्ट में क्या हुई दलीलें?
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ के समक्ष लालू यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मनिंदर सिंह पेश हुए।
* लालू यादव का पक्ष: उनके वकीलों ने तर्क दिया कि निचली अदालत ने "यांत्रिक तरीके" (Mechanically) से आरोप तय किए हैं और उनके खिलाफ कोई सीधा सबूत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि होटलों के टेंडर से जुड़े फैसले IRCTC बोर्ड के थे, न कि रेल मंत्री के व्यक्तिगत कार्यालय के।
* कोर्ट का रुख: जस्टिस शर्मा ने कहा कि निचली अदालत ने 13 अक्टूबर 2025 को ही आरोप तय कर दिए थे, लेकिन याचिका जनवरी में दायर की गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का पक्ष सुने ट्रायल पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
विवाद की जड़: क्या है IRCTC घोटाला?
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे।
* टेंडर में धांधली: आरोप है कि भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) के रांची और पुरी स्थित दो होटलों (BNR Hotels) के रखरखाव का टेंडर निजी कंपनी सुजाता होटल्स को नियमों के विरुद्ध जाकर दिया गया।
* लैंड फॉर टेंडर (Land for Job/Tender): बदले में, सुजाता होटल्स के मालिकों ने पटना में एक कीमती जमीन का टुकड़ा लालू यादव के परिवार से जुड़ी कंपनी 'लारा प्रोजेक्ट्स' को बहुत ही कम दामों पर हस्तांतरित किया।
* क्रेानी कैपिटलिज्म: निचली अदालत ने अपने आदेश में इसे "क्रेानी कैपिटलिज्म" (साठगांठ वाला पूंजीवाद) का उदाहरण बताया था, जहाँ सरकारी संपत्ति का लाभ निजी पार्टियों को देकर व्यक्तिगत लाभ कमाया गया।
किन धाराओं में तय हुए हैं आरोप?
ट्रायल कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और 11 अन्य के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा चलाने का आदेश दिया है:
* IPC की धारा 120B: आपराधिक साजिश रचना।
* IPC की धारा 420: धोखाधड़ी और जालसाजी।
* भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act): पद का दुरुपयोग कर अवैध लाभ उठाना।
भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत इन आरोपों में अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है।
यादव परिवार पर चौतरफा दबाव
यह मामला लालू यादव के साथ-साथ उनके पूरे परिवार के लिए चिंता का विषय है क्योंकि इसमें पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी नामजद आरोपी हैं। हाल ही में निचली अदालत ने इस मामले में 'डे-टू-डे' (रोजाना) सुनवाई का आदेश दिया था, जिससे मुकदमे की गति काफी तेज हो गई है। पिछले एक महीने में ही दो महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
निष्कर्ष और अगली सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने अब इस मामले में CBI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी 2026 को तय की गई है। तब तक के लिए निचली अदालत में ट्रायल की प्रक्रिया जारी रहेगी।
यह फैसला आरजेडी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका भी माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी आगामी चुनावों की तैयारी में जुटी है और ऐसे में शीर्ष नेतृत्व का अदालती चक्करों में उलझना कार्यकर्ताओं के मनोबल को प्रभावित कर सकता है।
