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राज्य में जमीन का रजिस्ट्रेशन केवल कागजों के आधार पर नहीं होगा, बल्कि GIS...

25-01-2026

बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री में होने वाली धोखाधड़ी और राजस्व (Revenue) की चोरी को रोकने के लिए नीतीश सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब राज्य में जमीन का रजिस्ट्रेशन केवल कागजों के आधार पर नहीं होगा, बल्कि GIS (Geographic Information System) और फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद ही प्रक्रिया पूरी होगी।

नई व्यवस्था: 'पहले जांच, फिर रजिस्ट्री'

 * GIS टेक्नोलॉजी का उपयोग: अब उप-निबंधक (Sub-Registrar) कार्यालय में जमीन के नक्शे और उसकी वास्तविक स्थिति को सैटेलाइट इमेज और GIS डेटा से मिलाया जाएगा। इससे यह पता चल सकेगा कि जिस जमीन की रजिस्ट्री हो रही है, वह वास्तव में खाली है या उस पर कोई निर्माण (Building) हो चुका है।

 * शहरी क्षेत्रों में कड़ाई: शहरों में रजिस्ट्री ऑफिस के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे आवेदन मिलने के 3 कार्य दिवसों के भीतर मौके पर जाकर जमीन का निरीक्षण करेंगे।

 * निर्माण की सही जानकारी: अक्सर लोग जमीन पर मकान या दुकान बनाकर भी उसे 'खाली जमीन' (Vacant Land) दिखाकर कम स्टाम्प ड्यूटी देते हैं। अब फिजिकल वेरिफिकेशन से निर्माण की श्रेणी (आवासीय या व्यावसायिक) का सही पता चलेगा।

इस फैसले के मुख्य उद्देश्य

| उद्देश्य | प्रभाव |

|---|---|

| धोखाधड़ी पर रोक | एक ही जमीन को कई बार बेचने या सरकारी जमीन की रजिस्ट्री पर लगाम लगेगी। |

| राजस्व में वृद्धि | सर्कल रेट के अनुसार सही टैक्स मिलेगा, जिससे सरकार का खजाना भरेगा। |

| विवादों में कमी | खरीदार को पता रहेगा कि जमीन की वास्तविक सीमा और स्थिति क्या है। |

| फर्जीवाड़ा खत्म | गलत चौहद्दी (Boundaries) बताकर रजिस्ट्री करना अब नामुमकिन होगा। |

आम जनता के लिए क्या बदलेगा?

 * पारदर्शिता: खरीदारों को अब यह डर नहीं रहेगा कि उन्होंने जो जमीन खरीदी है, वह मौके पर कुछ और है या उस पर कोई विवाद है।

 * समय सीमा: सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि वेरिफिकेशन की प्रक्रिया में देरी न हो, इसके लिए अधिकारियों के लिए समय सीमा (3 दिन) तय की गई है।

 * म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) में आसानी: फिजिकल वेरिफिकेशन पहले हो जाने से बाद में अंचल कार्यालय (CO Office) में होने वाले दाखिल-खारिज की प्रक्रिया काफी तेज और निर्विवाद हो जाएगी।

निष्कर्ष

यह फैसला बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की डिजिटल क्रांति का हिस्सा है। GIS आधारित वेरिफिकेशन से जमीन के नक्शे और रजिस्ट्री ऑफिस का डेटा आपस में लिंक हो जाएगा, जिससे भ्रष्टाचार पर सीधी चोट होगी।


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