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नेशनल हेराल्ड केस: सोनिया और राहुल गांधी को हाईकोर्ट का नोटिस, ED की 'अपील' ने बढ़ाई हलचल

23-12-2025

नई दिल्ली, 23 दिसंबर 2025

दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रविंद्र दुडेजा की पीठ ने सोमवार (22 दिसंबर) को देर शाम तक चली लंबी बहस के बाद सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किया। यह नोटिस प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका पर जारी किया गया है, जिसमें निचली अदालत (राउज एवेन्यू कोर्ट) के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसने गांधी परिवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की चार्जशीट (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था।

1. मामला क्या है? (निचली अदालत का झटका)

16 दिसंबर 2025 को राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने ED की 117 पन्नों की चार्जशीट को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह "कानूनी रूप से विचारणीय नहीं" है।

 * अदालत का तर्क: कोर्ट ने कहा था कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कार्रवाई के लिए किसी कानून प्रवर्तन एजेंसी द्वारा दर्ज की गई FIR (प्रथम सूचना रिपोर्ट) अनिवार्य है। चूंकि यह पूरा मामला सुब्रमण्यम स्वामी की एक 'निजी शिकायत' (Private Complaint) पर आधारित था, न कि किसी पुलिस FIR पर, इसलिए ED की चार्जशीट पर संज्ञान लेना कानूनन गलत होगा।

2. ED की दलील: "निचली अदालत ने कानून को उल्टा कर दिया"

हाईकोर्ट में ED की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि निचली अदालत का फैसला PMLA के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है।

 * दलील: मेहता ने तर्क दिया कि एक मजिस्ट्रेट द्वारा निजी शिकायत पर लिया गया संज्ञान (Cognizance) किसी पुलिस FIR से कहीं अधिक ऊंचे कानूनी पायदान पर होता है। उन्होंने कहा, "अगर इस फैसले को रहने दिया गया, तो यह उन सभी मनी लॉन्ड्रिंग मामलों को प्रभावित करेगा जो निजी शिकायतों से शुरू हुए हैं।"

 * आरोप: ED का आरोप है कि यंग इंडियन कंपनी (जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38% हिस्सेदारी है) ने महज 50 लाख रुपये में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कब्जा कर लिया।

3. कांग्रेस का पलटवार: "राजनीतिक प्रतिशोध की पराकाष्ठा"

अदालत के नोटिस के बाद कांग्रेस खेमे में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

 * पार्टी का स्टैंड: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और अन्य नेताओं ने इसे 'बदले की राजनीति' करार दिया है। पार्टी का कहना है कि जब निचली अदालत ने साफ कर दिया कि बिना FIR के यह केस नहीं चल सकता, तो सरकार जानबूझकर गांधी परिवार को प्रताड़ित करने के लिए ऊपरी अदालत में गई है।

 * प्रदर्शन की चेतावनी: दिल्ली समेत कई राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह जनता का ध्यान असल मुद्दों (जैसे महंगाई और बेरोजगारी) से भटकाने की साजिश है।

4. अगली सुनवाई और भविष्य की राह

हाईकोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ऑस्कर फर्नांडीस (दिवंगत), मोतीलाल वोरा (दिवंगत), सुमन दुबे और सैम पित्रोदा को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है।

 * तारीख: इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 12 मार्च 2026 को तय की गई है।

 * कानूनी पेच: इस बीच, दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने अक्टूबर 2025 में इस मामले में एक नई FIR दर्ज की है। ED इस नई FIR को आधार बनाकर अपनी जांच को फिर से जीवित करने की कोशिश कर रही है।

निष्कर्ष

यह मामला केवल एक कानूनी विवाद नहीं रह गया है, बल्कि 2026 में होने वाले विभिन्न राज्यों के चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन गया है। यदि हाईकोर्ट निचली अदालत के फैसले को पलट देता है, तो गांधी परिवार के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।


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