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छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर CBSE...

25-01-2026

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर CBSE (सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन) ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और स्वागत योग्य कदम उठाया है। अब देश भर के सभी संबद्ध स्कूलों के लिए करियर और मेंटल हेल्थ काउंसलर की नियुक्ति केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्यता होगी।

यह फैसला बोर्ड परीक्षाओं के दौरान और उसके बाद छात्रों पर बढ़ते तनाव (Academic Pressure) और करियर को लेकर पैदा होने वाले भ्रम को कम करने के लिए लिया गया है।

यहाँ इस नई व्यवस्था के मुख्य पहलू दिए गए हैं:

1. करियर काउंसलर: भविष्य की राह होगी आसान

अक्सर देखा जाता है कि छात्र सामाजिक दबाव या जानकारी के अभाव में गलत विषयों का चुनाव कर लेते हैं।

 * लक्ष्य समूह: कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्र।

 * भूमिका: काउंसलर छात्रों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार सही विषय (Streams) चुनने में मदद करेंगे। वे देश-दुनिया के नए उभरते करियर विकल्पों और प्रवेश परीक्षाओं के बारे में भी जानकारी देंगे।

2. मेंटल हेल्थ काउंसलर: तनाव मुक्त शिक्षा

बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सोशल मीडिया के दौर में छात्रों में एंग्जायटी और डिप्रेशन के मामले बढ़े हैं।

 * भूमिका: ये काउंसलर केवल छात्रों ही नहीं, बल्कि अभिभावकों (Parents) को भी सलाह देंगे कि वे बच्चों पर नंबरों का बेवजह दबाव न डालें।

 * सपोर्ट सिस्टम: जो छात्र किसी मानसिक परेशानी, अकेलेपन या पढ़ाई के बोझ से जूझ रहे हैं, उन्हें प्रोफेशनल मदद स्कूल परिसर के भीतर ही मिल सकेगी।

CBSE के नए दिशा-निर्देशों की मुख्य बातें

| विशेषता | विवरण |

|---|---|

| योग्यता | काउंसलर के पास मनोविज्ञान (Psychology) या काउंसलिंग में मान्यता प्राप्त डिग्री होनी चाहिए। |

| अनुपात | बड़े स्कूलों में छात्रों की संख्या के आधार पर एक से अधिक काउंसलर नियुक्त करने होंगे। |

| गोपनीयता | काउंसलिंग सत्रों को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा ताकि छात्र बिना डरे अपनी बात कह सकें। |

| एक्टिविटी | स्कूलों को नियमित अंतराल पर 'करियर फेयर' और 'मेंटल वेलनेस वर्कशॉप' आयोजित करनी होंगी। |

इस फैसले का महत्व क्यों है?

 * होलिस्टिक डेवलपमेंट: यह शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान से ऊपर उठाकर बच्चे के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित करता है।

 * गलत निर्णयों में कमी: समय पर मार्गदर्शन मिलने से छात्र अपनी पसंद के क्षेत्र में जाएंगे, जिससे भविष्य में उनके सफल होने की संभावना बढ़ेगी।

 * सुरक्षित वातावरण: स्कूल अब केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि भावनात्मक सुरक्षा का भी केंद्र बनेंगे।

निष्कर्ष

CBSE का यह कदम नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के उद्देश्यों के अनुरूप है। इससे न केवल छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि अभिभावकों को भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर सही दिशा मिल सकेगी।


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