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पटना का कायाकल्प: दीघा से दीदारगंज तक बनेगा 8 KM लंबा रिवर फ्रंट
पटनावासियों के लिए एक शानदार खबर है! साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर अब बिहार की राजधानी को भी एक आधुनिक और विश्वस्तरीय रिवर फ्रंट मिलने जा रहा है। यह परियोजना न केवल पटना की सूरत बदलेगी, बल्कि पर्यटन के मानचित्र पर शहर को एक नई पहचान भी देगी।
पटना का कायाकल्प: दीघा से दीदारगंज तक बनेगा 8 KM लंबा रिवर फ्रंट
पटना नगर निगम और नगर विकास विभाग ने दीघा से दीदारगंज के बीच गंगा नदी के किनारे एक अत्याधुनिक रिवर फ्रंट विकसित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। यह क्षेत्र जेपी गंगा पथ (Marine Drive) के समानांतर विकसित किया जाएगा।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं (DPR के अनुसार)
इस 8 किलोमीटर लंबे स्ट्रेच में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए कई आकर्षण होंगे:
* पैदल पथ (Walkway): गंगा के किनारे-किनारे लंबी दूरी तक टहलने के लिए एक सुंदर पैदल पथ बनाया जाएगा।
* हरित क्षेत्र और पार्क: कंक्रीट के जंगल के बीच शुद्ध हवा के लिए व्यापक पौधारोपण और लैंडस्केपिंग की जाएगी।
* फ्लोटिंग जेट्टी और बोटिंग: पर्यटकों के लिए गंगा की लहरों का आनंद लेने के लिए बोटिंग और छोटे क्रूज की सुविधा भी विकसित करने का प्रस्ताव है।
* स्मार्ट लाइटिंग और डेकोरेशन: रात के समय रिवर फ्रंट दूधिया रोशनी से सराबोर रहे, इसके लिए स्मार्ट एलईडी लाइटिंग और फाउंटेन लगाए जाएंगे।
* फूड कोर्ट और कियोस्क: स्थानीय व्यंजनों और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए कैफेटेरिया और छोटे स्टॉल्स के लिए जगह निर्धारित की जाएगी।
इससे क्या होगा फायदा?
* पर्यटन को बढ़ावा: मरीन ड्राइव के बाद यह पटना का दूसरा सबसे बड़ा टूरिस्ट हब बनेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
* शहर का सौंदर्यीकरण: अवैध कब्जों और गंदगी से मुक्त होकर गंगा का किनारा स्वच्छ और सुंदर दिखेगा।
* सेहत और मनोरंजन: जिम उपकरण, बच्चों के लिए खेलने की जगह और योगा डेक की सुविधा से शहरवासियों की जीवनशैली में सुधार होगा।
* कनेक्टिविटी: दीघा से दीदारगंज तक का यह इलाका न केवल सुगम होगा बल्कि लोग शाम के समय यहाँ सुकून के पल बिता सकेंगे।
वर्तमान स्थिति और समय सीमा
* DPR की तैयारी: पटना नगर निगम वर्तमान में इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर रहा है।
* बजट: अनुमान है कि इस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसके लिए केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से फंड जुटाया जाएगा।
* सर्वे: भूमि के चिह्नीकरण और तकनीकी पहलुओं का सर्वे जल्द ही शुरू होने वाला है।
