Near Janipur Thana, Phulwari Sharif, Patna
पटना में रिश्तों का कत्ल: 65 वर्षीय ससुर ने विधवा बहू को दिया शादी का प्रस्ताव
पटना से सामने आया यह मामला रिश्तों की मर्यादा और सामाजिक नैतिकता को झकझोर देने वाला है। एक ऐसा स्थान जहाँ ससुर को पिता तुल्य माना जाता है, वहां से इस तरह के प्रस्ताव ने कानूनी और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है।
पटना में रिश्तों का कत्ल: 65 वर्षीय ससुर ने विधवा बहू को दिया शादी का प्रस्ताव, प्रताड़ना से तंग आकर महिला आयोग पहुँची पीड़िता
बिहार की राजधानी पटना के एक संभ्रांत इलाके से मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। एक 35 वर्षीय विधवा महिला ने अपने 65 साल के ससुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का आरोप है कि उसके पति की मृत्यु के बाद सहारा देने के बजाय, उसका ससुर उस पर शादी करने और शारीरिक संबंध बनाने का अनैतिक दबाव बना रहा है।
घटना का विवरण: "हम दोनों अकेले हैं..."
पीड़िता के अनुसार, उसके पति के निधन के बाद घर में उसका जीना दूभर कर दिया गया है। महिला ने राज्य महिला आयोग में दी गई अपनी शिकायत में निम्नलिखित बातें कही हैं:
* अनैतिक प्रस्ताव: ससुर ने जबरन महिला का हाथ पकड़ा और कहा, "तुम भी इस घर में अकेली हो और मैं भी अकेला हूँ, समाज की फिक्र छोड़ो और चलो हम दोनों एक हो जाएं।"
* टॉर्चर का आरोप: जब महिला ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, तो उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। उसे घर के एक कमरे में बंद रखने और खाना न देने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
* परिवार की संलिप्तता: हैरान करने वाली बात यह है कि पीड़िता के अनुसार, परिवार के अन्य सदस्य (देवर और ननद) भी ससुर का ही साथ दे रहे हैं और महिला पर इस 'अवैध समझौते' के लिए दबाव बना रहे हैं।
कानूनी कार्रवाई: राज्य महिला आयोग की भूमिका
न्याय की गुहार लेकर पीड़िता बिहार राज्य महिला आयोग पहुँची है। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत संज्ञान लिया है:
* नोटिस जारी: आयोग ने आरोपी ससुर और परिवार के अन्य सदस्यों को तलब किया है।
* काउंसलिंग और सुरक्षा: महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय पुलिस स्टेशन को निर्देश दिए गए हैं।
* धाराओं के तहत केस: यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं (जैसे महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाना और घरेलू हिंसा) के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलू
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं समाज के नैतिक पतन को दर्शाती हैं।
* घरेलू हिंसा का नया रूप: विधवा महिलाओं को अक्सर संपत्ति या वासना के उद्देश्य से घर के भीतर ही प्रताड़ित किया जाता है।
* सुरक्षा का अभाव: परिवार, जिसे सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है, वहां इस तरह के प्रस्ताव महिला को गहरे मानसिक आघात (Trauma) में डाल देते हैं।
निष्कर्ष
यह मामला केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं है, बल्कि यह उन विधवा महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है जो अपने ससुराल में रहने को मजबूर हैं। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने आश्वासन दिया है कि पीड़िता को हर संभव कानूनी मदद दी जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
