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कर्नाटक की 4 सीटों पर दिलचस्प मुकाबला, मल्लिकार्जुन खड़गे आज दाखिल करेंगे नामांकन

05-06-2026


देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। भारतीय संसद के इस अहम सदन के लिए आगामी 18 जून 2026 को मतदान होना सुनिश्चित हुआ है। इस बार देश के विभिन्न राज्यों की खाली हो रही कुल 22 सीटों पर सभी राजनीतिक दलों की निगाहें टिकी हुई हैं। इन सीटों में से वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास 11 और कांग्रेस के पास 4 सीटें हैं। लेकिन इस पूरे चुनावी रण में सबसे ज्यादा चर्चा और राजनीतिक सरगर्मी कर्नाटक को लेकर है, जहां की 4 सीटों पर कड़ा और दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलने वाला है।

इसी सिलसिले में आज कांग्रेस खेमे से बड़ी खबर आ रही है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक में राज्यसभा चुनाव के लिए आज बेंगलुरु में अपना आधिकारिक नामांकन पत्र दाखिल करने जा रहे हैं।

तारीखों का खेल: कब है मतदान और कार्यकाल की समाप्ति?

भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, इस चुनावी प्रक्रिया की महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:

• नामांकन की आखिरी तारीख: जून के पहले सप्ताह के अंत तक।

• मतदान की तारीख : 18 जून 2026

• कार्यकाल की समाप्ति : वर्तमान राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल 25 जून 2026 को समाप्त हो रहा है।

सदन की निरंतरता बनाए रखने के लिए कार्यकाल समाप्त होने से ठीक एक सप्ताह पहले ही यानी 18 जून को वोट डाले जाएंगे और इसी दिन शाम तक परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे।

कर्नाटक की 4 सीटें: कौन से दिग्गज हो रहे हैं रिटायर?

कर्नाटक की जिन 4 सीटों पर यह चुनाव होने जा रहा है, वे सभी सीटें भारतीय राजनीति के बेहद कद्दावर नेताओं की हैं। इन सीटों के खाली होने से राज्य के समीकरणों में बदलाव आने की उम्मीद है। इन सीटों का प्रतिनिधित्व करने वाले निवर्तमान सांसद निम्नलिखित हैं:

1. मल्लिकार्जुन खड़गे (कांग्रेस): कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता, जिनका दोबारा उच्च सदन में जाना तय माना जा रहा है।

2. एच.डी. देवेगौड़ा (JD-S): देश के पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के सर्वोच्च नेता।

3. के. नारायण (BJP): भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सांसद।

4. एरन्ना कडाडी (BJP): भाजपा के एक और महत्वपूर्ण नेता, जो उत्तरी कर्नाटक में मजबूत पकड़ रखते हैं।

क्यों खास है कर्नाटक का यह चुनाव?

कर्नाटक में वर्तमान विधानसभा के संख्या बल को देखें, तो कांग्रेस राज्य की सत्ता में मजबूत स्थिति में है। राज्यसभा चुनाव में जीत का फैसला राज्य के विधायकों (MLAs) के मतों के आधार पर होता है।

संख्या बल का समीकरण: प्रत्येक उम्मीदवार को जीतने के लिए विधायकों के वोटों के एक निश्चित कोटे की आवश्यकता होती है। कर्नाटक विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखते हुए, कांग्रेस अपने विधायकों की संख्या के दम पर 4 में से कम से कम 2 से 3 सीटें आसानी से जीत सकती है। यही कारण है कि भाजपा की खाली हो रही कुछ सीटों पर इस बार कांग्रेस कब्जा जमा सकती है, जिससे उच्च सदन में कांग्रेस के आंकड़ों में बढ़ोतरी होगी।

इसी रणनीतिक बढ़त का फायदा उठाने के लिए कांग्रेस ने खड़गे के साथ-साथ अन्य युवा और स्थानीय चेहरों को भी मैदान में उतारा है, ताकि दक्षिण भारत में पार्टी की पकड़ और मजबूत की जा सके। दूसरी तरफ, भाजपा और जेडीएस (NDA गठबंधन) अपने बचे हुए विधायकों को एकजुट रखकर कम से कम सीटें गंवाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

निष्कर्ष: संसद के भीतर शक्ति संतुलन की लड़ाई

18 जून को होने वाले ये राज्यसभा चुनाव केवल सांसदों को चुनने का जरिया नहीं हैं, बल्कि यह संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की एक बड़ा राजनीतिक बिसात है। मल्लिकार्जुन खड़गे का आज नामांकन दाखिल करना कांग्रेस के लिए एक बड़े शक्ति प्रदर्शन जैसा है। 25 जून को इन सभी नेताओं का कार्यकाल समाप्त होने के बाद, उच्च सदन को जो नए चेहरे मिलेंगे, वे आने वाले समय में देश के विधायी कार्यों और नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे। अब देखना यह है कि क्या सभी उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाते हैं या 18 जून को विधानसभा के भीतर कोई नया सियासी उलटफेर देखने को मिलता है।

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