Near Janipur Thana, Phulwari Sharif, Patna
पत्थर खदान में धमाका, 4 की मौत, कई फंसे
ओडिशा के ढेंकनाल जिले में शनिवार की शाम एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने औद्योगिक सुरक्षा और अवैध खनन की गंभीर वास्तविकता को एक बार फिर सामने ला दिया है। ढेंकनाल के मोटांगा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गोपालपुर गांव के पास स्थित एक पत्थर खदान में हुए शक्तिशाली विस्फोट और उसके बाद हुए भूस्खलन में अब तक कई मजदूरों के हताहत होने की खबर है।
हादसे का विवरण: कब और कैसे हुआ विस्फोट?
यह दुखद घटना 3 जनवरी, 2026 (शनिवार) की रात करीब 8:30 बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जांच के अनुसार, खदान में पत्थर तोड़ने के लिए 'ब्लास्टिंग' (विस्फोट) की प्रक्रिया चल रही थी। बताया जा रहा है कि विस्फोट के समय खदान के भीतर और आसपास कई मजदूर काम कर रहे थे।
विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि खदान का एक बड़ा हिस्सा और ऊपरी मिट्टी (Overburden) ताश के पत्तों की तरह ढह गई। भारी-भरकम चट्टानें और मलबा सीधे नीचे काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरा। शुरुआती जानकारी में 4 मजदूरों की मौत की बात सामने आई थी, जबकि आधिकारिक तौर पर जिला प्रशासन ने अब तक दो शवों के बरामद होने की पुष्टि की है और आशंका जताई है कि मलबे के नीचे और भी मजदूर दबे हो सकते हैं।
राहत और बचाव कार्य (Rescue Operations)
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन हरकत में आ गया। हालांकि, रात के अंधेरे और जंगली हाथियों के मूवमेंट वाले इलाके होने के कारण शुरुआती घंटों में बचाव कार्य में काफी चुनौतियां आईं।
* बचाव दल: मौके पर ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) और अग्निशमन सेवा की कई टीमें तैनात की गई हैं।
* तकनीकी मदद: मलबे के नीचे दबे लोगों का पता लगाने के लिए डॉग स्क्वॉड (Dog Squad) की मदद ली जा रही है। साथ ही, भारी पत्थरों को हटाने के लिए कई जेसीबी (JCB) और आधुनिक कटर मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
* प्रशासनिक निगरानी: ढेंकनाल के जिलाधिकारी (Collector) आशीष ईश्वर पाटिल और पुलिस अधीक्षक (SP) अभिनव सोनकर खुद मौके पर मौजूद रहकर रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं।
अवैध खनन का गंभीर आरोप
इस हादसे ने जिले में चल रहे अवैध खनन के काले कारोबार की पोल खोल दी है। जिला प्रशासन की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
* समाप्त लीज: जांच में पता चला है कि इस पत्थर खदान की लीज (पट्टा) दिसंबर 2025 में ही समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद यहां धड़ल्ले से खनन जारी था।
* ब्लास्टिंग पर रोक: खदान में विस्फोट (Blasting) करने की अनुमति प्रशासन द्वारा सितंबर 2025 में ही रद्द कर दी गई थी। नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बिना किसी सुरक्षा मानकों के शनिवार रात ब्लास्टिंग की गई, जो इस हादसे का मुख्य कारण बनी।
* सुरक्षा मानकों की अनदेखी: स्थानीय लोगों का आरोप है कि खदान मालिक अधिक मुनाफे के चक्कर में मजदूरों की जान जोखिम में डालकर रात के अंधेरे में अवैध काम करवा रहे थे।
मृतकों की पहचान और राजनीतिक प्रतिक्रिया
अब तक बरामद हुए दो शवों की पहचान के प्रयास जारी हैं। जिलाधिकारी के अनुसार, एक मृतक बालासोर जिले का रहने वाला है, जबकि दूसरा क्योंझर या मयूरभंज जिले का बताया जा रहा है।
इस घटना पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:
> "ढेंकनाल में पत्थर खदान में हुए हादसे से मैं स्तब्ध हूं। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। सरकार को इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।"
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प्रशासन की कार्रवाई
जिलाधिकारी आशीष ईश्वर पाटिल ने स्पष्ट कर दिया है कि खदान के पट्टाधारक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा। वर्तमान में खदान को पूरी तरह सील कर दिया गया है और वहां पुलिस बल तैनात है ताकि सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि पूरे जिले में चल रही सभी पत्थर खदानों के दस्तावेजों की फिर से जांच की जाएगी और अवैध खनन पर पूर्ण विराम लगाया जाएगा।
निष्कर्ष:
यह हादसा केवल एक तकनीकी विफलता नहीं बल्कि प्रशासनिक शिथिलता और माफियाओं के बेखौफ होने का परिणाम है। जब तक सुरक्षा नियमों और लीज की शर्तों का सख्ती से पालन नहीं होगा, तब तक बेगुनाह मजदूरों की जान इसी तरह जोखिम में बनी रहेगी।
