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प्रयागराज में संगम की पावन रेती पर माघ मेला 2026 का औपचारिक आगाज

03-01-2026

प्रयागराज में संगम की पावन रेती पर माघ मेला 2026 का औपचारिक आगाज हो गया है। आज, 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के शुभ अवसर पर प्रथम मुख्य स्नान के साथ ही आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। यह मेला न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था, संयम और तपस्या का जीवंत प्रतीक है।

माघ मेला 2026: आस्था, परंपरा और आधुनिक प्रबंधन का संगम

1. पौष पूर्णिमा: मेले का शुभ आरंभ

हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मेले की शुरुआत पौष पूर्णिमा से होती है। आज कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद, भोर से ही श्रद्धालुओं का संगम तट पर पहुँचना शुरू हो गया था। 'हर-हर गंगे' और 'जय माँ गंगे' के उद्घोष के बीच लाखों लोगों ने त्रिविणी संगम (गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती) में डुबकी लगाई। प्रशासन के अनुसार, पहले दिन लगभग 15 से 20 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है, जो दिन चढ़ने के साथ और बढ़ सकता है।

2. कल्पवास: कठिन साधना का संकल्प

माघ मेले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 'कल्पवास' है। आज से लाखों कल्पवासी संगम तट पर अपनी एक महीने की कठिन साधना शुरू कर रहे हैं।

 * नियम: कल्पवासी एक महीने तक फूस की झोपड़ियों में रहते हैं, जमीन पर सोते हैं, दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन करते हैं और तीन बार गंगा स्नान करते हैं।

 * आध्यात्मिक महत्व: माना जाता है कि माघ के महीने में संगम तट पर निवास करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है और वह आध्यात्मिक रूप से पुनर्जीवित होता है।

3. 'मिनी कुंभ' की भव्यता और बुनियादी ढांचा

योगी सरकार ने इस साल माघ मेले को 'मिनी कुंभ' के रूप में आयोजित करने का निर्णय लिया है, जो 2025 के महाकुंभ की रिहर्सल जैसा है।

 * विस्तार: मेला क्षेत्र को लगभग 800 हेक्टेयर में फैलाया गया है, जिसे 7 से अधिक सेक्टरों में विभाजित किया गया है।

 * स्नान घाट: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए संगम और गंगा के किनारे लगभग 8 किलोमीटर लंबे अस्थायी घाट बनाए गए हैं।

 * सुविधाएं: मेले में 5000 से अधिक धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं को शिविर लगाने के लिए जमीन आवंटित की गई है। पूरे क्षेत्र में एलईडी लाइट्स, चौड़ी चेकर्ड प्लेट सड़कें और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की गई है।

4. सुरक्षा का अभेद्य किला: तकनीक और मुस्तैदी

इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं:

 * सुरक्षा बल: मेला क्षेत्र में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी, पीएसी की कंपनियां, और एटीएस (ATS) के कमांडो तैनात किए गए हैं।

 * तकनीकी निगरानी: पूरे मेला क्षेत्र पर CCTV कैमरों और ड्रोन के जरिए 'इंटिग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर' (ICCC) से पैनी नजर रखी जा रही है। एआई (AI) कैमरों का उपयोग भीड़ के घनत्व को मापने के लिए किया जा रहा है।

 * जल सुरक्षा: संगम में गहरे पानी की बैरिकेडिंग की गई है। जल पुलिस के साथ-साथ NDRF और SDRF की टीमें मोटर बोट के साथ 24 घंटे गश्त कर रही हैं।

 * यातायात प्रबंधन: शहर में भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित किया गया है और श्रद्धालुओं के लिए विशेष पार्किंग जोन बनाए गए हैं। रेलवे और रोडवेज ने भी अतिरिक्त 'मेला स्पेशल' ट्रेनें और बसें चलाई हैं।

5. आगामी स्नान पर्वों की तिथियाँ

माघ मेला 44 दिनों तक चलेगा और इसका समापन 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के दिन होगा। मुख्य स्नान की तारीखें निम्नलिखित हैं:

 * मकर संक्रांति: 14-15 जनवरी

 * मौनी अमावस्या: 18 जनवरी (सबसे बड़ा स्नान पर्व)

 * बसंत पंचमी: 23 जनवरी

 * माघी पूर्णिमा: 1 फरवरी

 * महाशिवरात्रि: 15 फरवरी

निष्कर्ष

प्रयागराज का माघ मेला केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता को दर्शाता है। जहाँ एक तरफ साधु-संतों के प्रवचन और भजन गुंजायमान हैं, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक प्रशासन की चौकसी श्रद्धालुओं के लिए इसे सुरक्षित और सुलभ बना रही है। संगम की रेती पर बना यह 'तंबुओं का शहर' अगले डेढ़ महीने तक भक्ति और शक्ति का केंद्र बना रहेगा।


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