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भारत-UAE शिखर वार्ता: क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास पर महामंथन
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान आज, 19 जनवरी 2026 को भारत के एक दिवसीय आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुँच रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रहा यह दौरा दोनों देशों के बीच "व्यापक रणनीतिक साझेदारी" (Comprehensive Strategic Partnership) को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत-UAE शिखर वार्ता: क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास पर महामंथन
राष्ट्रपति बनने के बाद शेख मोहम्मद बिन जायद का यह तीसरा भारत दौरा है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया (Middle East) में ईरान-इजरायल तनाव और लाल सागर (Red Sea) में सुरक्षा संकट के कारण वैश्विक चिंताएं बढ़ी हुई हैं।
यात्रा का मुख्य एजेंडा और चर्चा के विषय
* ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): भारत और UAE के बीच रणनीतिक तेल भंडार और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) को लेकर नए समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
* ईरान और क्षेत्रीय संकट: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच दोनों नेता क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बहाली पर चर्चा करेंगे। भारत के लिए UAE एक महत्वपूर्ण सहयोगी है जो अरब जगत में संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है।
* व्यापार और निवेश: भारत-UAE द्विपक्षीय व्यापार $100 बिलियन के आंकड़े को पार कर चुका है। इस दौरे में Local Currency Settlement (LCS) सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा, ताकि व्यापार रुपये और दिरहम में हो सके।
* रक्षा सहयोग: दोनों देशों के बीच रक्षा उद्योग और तकनीक साझा करने (Technology Transfer) पर भी बातचीत होगी।
भारत के लिए UAE का महत्व
* तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार: अमेरिका और चीन के बाद UAE भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है।
* प्रवासी भारतीय: UAE में लगभग 35 लाख भारतीय रहते हैं, जो भारत की अर्थव्यवस्था में रेमिटेंस (Remittance) के जरिए बड़ा योगदान देते हैं।
* रणनीतिक निवेश: अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल सेक्टर में भारी निवेश कर रही है।
कार्यक्रम की रूपरेखा (आज का शेड्यूल)
* दोपहर 4:20 बजे: पालम एयरफोर्स स्टेशन पर आगमन।
* शाम 4:45 बजे: लोक कल्याण मार्ग (LKM) पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता।
* शाम 6:05 बजे: दिल्ली से रवानगी।
निष्कर्ष
भले ही यह एक छोटा "वर्किंग विजिट" है, लेकिन इसकी टाइमिंग और इसमें शामिल विषय भारत की 'एक्ट वेस्ट' (Act West) नीति की सफलता को दर्शाते हैं। यह दौरा न केवल व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक पकड़ को भी और पुख्ता करेगा।
