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मोबाइल रील्स देखते-देखते 10 साल के मासूम की मौत: अमरोहा की घटना ने उड़ाए सबके होश
मोबाइल रील्स देखते-देखते 10 साल के मासूम की मौत: अमरोहा की घटना ने उड़ाए सबके होश
आजकल के डिजिटल युग में मोबाइल फोन बच्चों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है, लेकिन इसके घातक परिणाम अब जानलेवा साबित हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में एक 10 साल के बच्चे की मोबाइल पर रील्स (Reels) देखते समय अचानक मौत हो गई। डॉक्टरों का प्राथमिक अनुमान है कि बच्चे को साइलेंट हार्ट अटैक आया था।
घटना का विवरण: क्या हुआ उस दिन?
अमरोहा के रजबपुर इलाके का यह मामला है। परिजनों के अनुसार, 10 वर्षीय बच्चा रोज की तरह बेड पर आराम से बैठकर मोबाइल चला रहा था। वह काफी देर से रील्स देखने में मग्न था।
* अचानक बेहोशी: रील्स देखते-देखते बच्चा अचानक बेड से नीचे गिर पड़ा और बेहोश हो गया।
* अस्पताल में घोषणा: आनन-फानन में परिजन उसे नजदीकी निजी अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसकी मृत्यु हो चुकी थी।
* शोक की लहर: मासूम की अचानक मौत से परिवार में कोहराम मच गया है और पूरे गांव में मातम का माहौल है।
डॉक्टरों की राय: आखिर 10 साल के बच्चे को हार्ट अटैक क्यों?
हृदय रोग विशेषज्ञों (Cardiologists) का मानना है कि इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक आने के पीछे कई छिपे हुए कारण हो सकते हैं, जिन्हें मोबाइल का अत्यधिक उपयोग ट्रिगर कर सकता है:
* ओवर-स्टिमुलेशन (Over-stimulation): लगातार तेज संगीत और बदलते दृश्यों वाली रील्स देखने से मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे अचानक दिल की धड़कन (Heart Rate) अनियमित हो सकती है।
* शारीरिक निष्क्रियता: घंटों एक ही मुद्रा में बैठकर मोबाइल देखने से शरीर में रक्त का संचार प्रभावित होता है।
* तनाव और उत्तेजना: रील्स या वीडियो गेम्स के दौरान होने वाली अचानक उत्तेजना (Surprise or Shock) कमजोर दिल वाले बच्चों के लिए घातक हो सकती है।
* पोस्ट-कोविड प्रभाव: कुछ डॉक्टर इसे पोस्ट-कोविड जटिलताओं या जन्मजात हृदय रोगों से भी जोड़कर देख रहे हैं जो पहले कभी सामने नहीं आए थे।
अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव (Safety Tips)
बाल रोग विशेषज्ञों ने इस घटना के बाद माता-पिता के लिए कुछ जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
* स्क्रीन टाइम सीमित करें: 10-12 साल के बच्चों के लिए मनोरंजन का स्क्रीन टाइम रोजाना 1 घंटे से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
* शारीरिक गतिविधियों पर जोर: बच्चों को मोबाइल देने के बजाय बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें।
* लक्षणों को पहचानें: यदि बच्चा बार-बार थकान, सीने में भारीपन या सांस फूलने की शिकायत करे, तो उसे नजरअंदाज न करें।
* निगरानी: बच्चा मोबाइल पर क्या देख रहा है और कितनी देर से देख रहा है, इस पर हमेशा नजर रखें।
निष्कर्ष
अमरोहा की यह घटना एक 'वेक-अप कॉल' है। मोबाइल का नशा अब केवल आंखों या दिमाग को ही नहीं, बल्कि सीधे बच्चों के दिल को भी निशाना बना रहा है। समाज और माता-पिता को मिलकर तकनीक के इस जानलेवा इस्तेमाल पर लगाम लगानी होगी।
